प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रत्येक रविवार को लगने वाला ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला’ का बनाया गया मजाक।
जमानियां :- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर हर रविवार को लगने वाला ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला’ इन दिनों अपनी बदहाली और जिम्मेदारों की लचर कार्यशैली के चलते गंभीर सवालों के घेरे में है। मेले के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है, जबकि धरातल पर स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों और प्रमुख राजनीतिक-सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की खामोशी पर गहरा रोष व्यक्त किया है।
चिकित्सकों की गैर-मौजूदगी- पीएचसी पर तैनात डॉक्टर समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते। मौसमी बीमारियों की चपेट में आकर दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज के ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
फार्मासिस्ट नदारद – वार्ड ब्वॉय के कंधे पर जिम्मेदारी*
यहां अस्पताल में दवाओं की भारी कमी के साथ-साथ फार्मासिस्ट का पद भी सुचारू रूप से संचालित नहीं दिख रहा। आरोप है कि गंभीर और सामान्य मरीजों को दवा देने का पूरा जिम्मा वार्ड ब्वॉय संभाल रहे हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
बैनर और प्रचार गायब- स्थिति इतनी हास्यास्पद हो चुकी है कि मेले का मुख्य बैनर तक हमेशा के लिए गायब कर दिया गया है, जिससे यह मेला महज एक ‘मजाक’ बनकर रह गया है।
फर्जी उपस्थिति और कागजी लीपापोती- स्थानीय लोगों और नेताओं का आरोप है कि मेले में डॉक्टरों की उपस्थिति केवल कागजों तक सीमित है। विभागीय अधिकारियों को गुमराह और खुश करने के लिए रजिस्टर में फर्जी तरीके से नाम और आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं।
“मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का मूल उद्देश्य नगर और ग्रामीण अंचलों से आने वाले गरीब व पीड़ित मरीजों का समुचित इलाज करना था। लेकिन आज डॉक्टरों की भारी लापरवाही के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं और आम जनता बेहाल है।” नारायण दास चौरसिया, भाजपा कार्यकर्ता ने बताया कि
“इस समय क्षेत्र में मौसमी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, ऐसे में पीएचसी पर डॉक्टरों का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कागजी आंकड़ेबाजी और औपचारिकता से जनता का भला नहीं होने वाला।”
मुन्ना गुप्ता (जिला युवा उपाध्यक्ष,व्यापार मंडल) ने कहा कि
“प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। मरीजों को वास्तविक लाभ मिलने के बजाय केवल कोरे आश्वासन मिल रहे हैं।” मोहम्मद इजहार खान( तहसील अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार) ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है l
ग्रामीणों और विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) से तत्काल प्रभाव से इस पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि लापरवाह चिकित्सकों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता को साथ खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। (संवाददाता विकास सिंह की रिपोर्ट)

