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हमीद सेतु पर बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच पी-6 और पी-7 पिलर के बीच लगी एक बेयरिंग में क्रैक।

हमीद सेतु पर बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच पी-6 और पी-7 पिलर के बीच लगी एक बेयरिंग में क्रैक।

गाजीपुर :- जिले में गंगा नदी पर स्थित हमीद सेतु पर बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच रविवार को इसकी सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती की जांच के लिए दिल्ली से पहुंची भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ब्रिज एक्सपर्ट टीम ने मोर्चा संभाल लिया।मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट (MBIU) के जरिए की गई जांच में पी-6 और पी-7 पिलर के बीच लगी एक बेयरिंग में क्रैक मिलने से अधिकारियों में हलचल मच गई। इसके बाद टीम ने सेतु के विभिन्न स्पैन, ज्वाइंटर और बेयरिंग की बारीकी से जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान सेतु पर वाहनों का आवागमन वन-वे रखा गया।

इससे रुक-रुककर जाम जैसी स्थिति बनती रही और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। टीम ने मोबाइल इंस्पेक्शन यूनिट की मदद से सेतु के ऊपरी हिस्से, गर्डर बॉक्स के स्पैन और ज्वाइंटर के बीच लगी बेयरिंग की स्थिति का निरीक्षण किया। एक बेयरिंग में क्रैक मिलने के बाद उसे बदलने की तैयारी तेज कर दी गई है।

मरम्मत के दौरान यातायात प्रभावित होने की आशंका से गंगा पार के लोगों, राहगीरों और निजी एवं सरकारी वाहनों के चालकों जांच के दौरान सेतु पर वाहनों का आवागमन वन-वे रखा गया। इससे रुक-रुककर जाम जैसी स्थिति बनती रही और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। टीम ने मोबाइल इंस्पेक्शन यूनिट की मदद से सेतु के ऊपरी हिस्से, गर्डर बॉक्स के स्पैन और ज्वाइंटर के बीच लगी बेयरिंग की स्थिति का निरीक्षण किया।

एक बेयरिंग में क्रैक मिलने के बाद उसे बदलने की तैयारी तेज कर दी गई है। मरम्मत के दौरान यातायात प्रभावित होने की आशंका से गंगा पार के लोगों, राहगीरों और निजी एवं सरकारी वाहनों के चालकों की चिंता बढ़ गई है। गौरतलब है कि हमीद सेतु की बेयरिंग पहले भी कई बार क्षतिग्रस्त हो चुकी है। वर्ष 2015 से 2020 के बीच अलग-अलग वर्षों में बेयरिंग बदलने का काम कराया गया था।

बार-बार सामने आ रही इस समस्या ने सेतु के रखरखाव और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 1100 मीटर लंबे इस सेतु की आधारशिला वर्ष 1975 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने रखी थी। लगभग दस वर्षों में बनकर तैयार हुए इस पुल को वर्ष 1985 में आमजन के आवागमन के लिए खोल दिया गया था। 12 पिलर, 26 ज्वाइंटर और 52 बेयरिंग पर रुके हुए है।

इस कैंटीलीवर सस्पेंडेड सेतु से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े यात्री और मालवाहक वाहन गुजरते हैं, ऐसे में इसकी सुरक्षा जांच और समयबद्ध मरम्मत बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। एन एच ए आई के परियोजना निदेशक अजय सिंह ने बताया कि दिल्ली से बुलाई गई ब्रिज एक्सपर्ट टीम की जांच में एक बेयरिंग क्रैक मिली है। फिलहाल जांच जारी है और जल्द ही बेयरिंग बदलें का कार्य किया जाएगा l  (विकास सिंह की रिपोर्ट)

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