Friday, October 16, 2026
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मुस्कान-साहिल दोषी करार, नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत 14 अक्टूबर को सजा पर देगी फैसला।

मुस्कान-साहिल दोषी करार, नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत 14 अक्टूबर को सजा पर देगी फैसला।

मेरठ :- जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बुधवार को सौरभ राजपूत की हत्या की आरोपी उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। सजा पर फैसला 14 अक्टूबर को सुनाएगी। हत्या आरोपी मुस्कान और साहिल की जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हुई।अदालत का फैसला सुनने के बाद दोनों रोते हुए अपनी-अपनी बैरक में लौट गए। यह हत्याकांड देशभर में नीले ड्रम कांड से काफी चर्चित रहा है। इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने ब्रह्मपुरी निवासी मुस्कान रस्तोगी से 2016 में प्रेम विवाह किया था। सौरभ लंदन में नौकरी करते थे और पत्नी मुस्कान मेरठ में रहती थी। इसी दौरान मुस्कान का अपने पुराने दोस्त साहिल शुक्ला से करीबी संबंध बन गए।

24 फरवरी 2025 को सौरभ अपनी छह साल की बेटी और पत्नी मुस्कान का जन्मदिन मनाने के लिए लंदन से घर आए थे। संबंधों में बाधा बनने पर मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने सौरभ की तीन मार्च 2025 की रात हत्या कर दी। हत्या करने से पहले मुस्कान ने सौरभ के खाने में नशीली दवा मिला दी। जब सौरभ बेसुध हो गए तो मुस्कान ने फोन करके अपने प्रेमी साहिल को घर बुला लिया।

दोनों ने उस्तरे और चाकू से हत्या कर दी। शव को टुकड़े करके नीले ड्रम में भरने के बाद मुस्कान अपने प्रेमी के साथ घूमने चली गई। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को उनके घर से 19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अदालत में 12 मई 2025 को करीब हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।

शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में भरा—- सौरभ की हत्या करने के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने जो तरीका अपनाया उसकी चर्चा देश भर में रही। हत्या के बाद दोनों ने सिर को धड़ से अलग कर दिया और दोनों हाथों की कलाइयां काट दीं। बाजार से अनाज रखने वाला बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदकर लाए।

शव के कटे हुए टुकड़ों को पॉलिथीन में लपेटकर नीले ड्रम में रख दिए। दुर्गंध रोकने के लिए ऊपर सीमेंट और डस्ट का भारी घोल डालकर सील कर दिया। इसके बाद दोनों शिमला-मनाली घूमने चले गए। समाज को झकझोर देते हैं ऐसे अपराध : न्यायाधीश।दोनों दोषियों ने न केवल सौरभ की हत्या की बल्कि उसके शव के टुकड़े कर दिया।

ऐसे अपराध समाज को झकझोर देते हैं और सामाजिक तानेबाने को तोड़कर डर पैदा करते हैं। – अरविंद कुमार मिश्रा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश मेरठ गवाहों और साक्ष्यों से साबित हुआ दोष।  केस की गंभीरता को देखते हुए मामले की अदालत में प्रतिदिन सुनवाई हुई।

इस तरह करीब 125 तारीखों पर जिला जज ने दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनी। इस दौरान 22 गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष के चश्मदीद गवाह नहीं होने और संपत्ति विवाद में फंसाए जाने के तर्कों को दरकिनार करते हुए अदालत ने गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों को हत्या का दोषी माना। मामले में पुलिस की विवेचना और चिकित्सीय साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए निर्णायक साबित हुए।

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