Wednesday, September 9, 2026
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माँ गंगा के पावन तट भगवान श्रीकृष्ण के बाललीला का सजीव चित्रण कर कलाकारों ने दर्शको को किया भावविभोर।

माँ गंगा के पावन तट भगवान श्रीकृष्ण के बाललीला का सजीव चित्रण कर कलाकारों ने दर्शको को किया भावविभोर।

जमानिया – स्थानीय क्षेत्र माँ गंगा उत्तर वाहिनी सेवा समिति के तत्वावधान में माँ गंगा के पावन तट बलुआ घाट पर आयोजित कार्यक्रम में वृन्दावन से आये कलाकारों ने रविवार को भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का सजीव चित्रण किया।

फ़ोटो- नन्दबाबा के ऊपर खेलते भगवान श्रीकृष्ण

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता विनोद सिंह का समिति के अध्यक्ष कमलचंद बाबा द्वारा स्वागत एवम् अभिनन्दन किया गया

कार्यक्रम में कलाकारों ने भगवान् बालकृष्ण की शयनावस्था का सुंदर चित्रण किया हैं। वह कहते हैं की मैया यशोदा श्रीकृष्ण को पालने में झुला रही है। कभी तो वह पालने को हल्का सा हिला देती हैं, कभी कन्हैया को प्यार करने लगती हैं और कभी चूमने लगती हैं।

ऐसा करते हुए वह जो मन में आता हैं वही गुनगुनाने भी लगती हैं। लेकिन कन्हैया को तब भी नींद नहीं आती हैं। इसलिए यशोदा नींद को उलाहना देती हैं की आरी निंदिया तू आकर मेरे लाल को सुलाती क्यों नहीं? तू शीघ्रता से क्यों नहीं आती? देख, तुझे कान्हा बुलाता हैं।

जब यशोदा निंदिया को उलाहना देती हैं तब श्रीकृष्ण कभी पलकें मूंद लेते हैं और कभी होठों को फड़काते हैं। जब कन्हैया ने नयन मूंदे तब यशोदा ने समझा की अब तो कान्हा सो ही गया हैं। तभी कुछ गोपियां वहां आई। गोपियों को देखकर यशोदा उन्हें संकेत से शांत रहने को कहती हैं।इसी अंतराल में श्रीकृष्ण पुन: कुनमुनाकर जाग गए। तब उन्हें सुलाने के उद्देश से पुन: मधुर मधुर लोरियां गाने लगीं। नंद पत्नी यशोदा के भाग्य की सराहना करते हुए कहते है की सचमुच ही यशोदा बड़भागिनी हैं क्योंकि ऐसा सुख तो देवताओं और ऋषि-मुनियों को भी प्राप्त नहीं होता ।

श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में माखन चोरी की लीला सुप्रसिध्द है। वैसे तो कान्हा ग्वालिनों के घरो में जाकर माखन चुराकर खाया करते थे। लेकिन आज उन्होंने अपने ही घर में माखन चोरी की और यशोदा मैया ने उन्हें देख लिया। श्रीकृष्ण की चतुराई का जिस प्रकार वर्णन किया है वैसा कही नहीं मिलता।

यशोदा मैया ने देखा की कान्हा ने माखन खाया हैं तो उन्होंने कान्हा से पूछा की क्यों रे कान्हा! तूने माखन खाया है क्या? तब बालकृष्ण ने अपना पक्ष किस तरह मैया के सामने प्रस्तुत करते हैं, यही इस दोहे की विशेषता हैं।

कन्हैया बोले ..मैया! मैंने माखन नहीं खाया हैं। मुझे तो ऐसा लगता हैं की ग्वाल – बालों ने ही बलात मेरे मुख पर माखन लगा दिया है। फिर बोले की मैया तू ही सोच, तूने यह छींका किना ऊंचा लटका रखा हैं मेरे हाथ भी नहीं पहुच सकते हैं।

कन्हैया ने मुख से लिपटा माखन पोंछा और एक दोना जिसमें माखन बचा था उसे छिपा लिया।कन्हैया की इस चतुराई को देखकर यशोदा मन ही मन में मुस्कुराने लगी और कन्हैया को गले से लगा लिया। यशोदा मैया को जिस सुख की प्राप्ति हुई वह सुख शिव व ब्रम्हा को भी दुर्लभ हैं।

वही कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण के बाललीला और माँ गंगा के लहरों की मधुर से संगीत से वहां दर्शको को भावविभोर कर दिया।

उक्त अवसर पर आचार्य सन्तोष पाण्डेय , अभय शंकर सोनी , मुन्ना गुप्ता , शशि कांत सिंह , मनोज कुमार सिंह , गोविन्द दास , इत्यादि लोग मौजूद रहे रहे

 

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