गाज़ीपुर के महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा कॉलेज में अब लैप्रोस्कोपी यानि दूरबीन विधि से चिकित्सक करेगें लोगों का ईलाज।
जिलाधिकारी गाज़ीपुर आर्य अखौरी ने अपने हाथों से फीता काटकर किया शुभारम्भ।
गाजीपुर- महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को जिलाधिकारी आर्यका अखौरी द्वारा लेप्रोस्कोपी कक्ष का शुभारम्भ फीता काटकर किया गया। जिस दौरान उन्होंने ओटी में पहुंच कर ऑपरेशन किए गए मरीज मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया।

जिलाधिकारी को प्रधानाचार्य डॉ0 आनन्द कुमार मिश्र ने बताया कि Laproscopic मशीन (दूरबीन विधि द्वारा) लेप्रोस्कोपी से अनेको बीमारियों का निदान किया जा सकता है जैसे कि हर्निया, पित्ताशय की पथरी, लिवर कैंसर, फाइब्रॉइड्स, एंडोमेट्रियोसिस, बांझपन, पैंक्रियाज, ओवेरियन सिस्ट, पेट का ट्यूमर आदि। ओपन सर्जरी की तुलना में लेप्रोस्कोपी सर्जरी एक सुरक्षित और सफल प्रक्रिया है।
जिस दौरान सर्जन डॉ. दीपिका पाटिल ने शुक्रवार को मेडिकल कालेज में पहला दूरबीन विधि से ऑपरेशन किया। डॉ. दीपिका पाटिल ने 50 वर्षीय महिला गुड़िया देवी के पित्त में पथरी का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया साथ ही बताया कि लैप्रोस्कोपी यानि दूरबीन विधि से ऑपरेशन बहुत ही सफल प्रक्रिया है जिसमें मरीज के शरीर में छोटे सा चीरा लगाकर सर्जरी कर दिया जाता है।

जबकि नार्मल सर्जरी में इसके लिए बड़ा चीरा लगाना पड़ता है, इसमें ब्लीडिंग भी बहुत कम होता है। और दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने के एक दिन के बाद मरीज को घर जाने के लिए छोड दिया जाता है और पांच दिन के अंदर मरीज अपना काम-काज शुरू कर देता है। जबकि सामान्य ऑपरेशन में मरीज को करीब आठ दिन हास्पिटल में रहना पड़ता है और तीन महीनो तक अपना काम-काम या भारी वजन नही उठा सकता है।
इस दौरान डॉ0 रामकृत राम, डॉ0 रविशंकर ,डॉ 0 सुधीर यादव , डॉ0 ए०के०पाण्डेय, रचना श्रीवास्तव, ओटी टेक्नीशियन विवेक उपाध्याय, मनीष राजभर व समस्त चिकित्सा कर्मचारी उपस्थित रहे।

