प्रदेश के मुखिया ने विजयादशमी पर रावणरुपी समाज विरोधियों पर जमकर हमला बोला।
गोरखपुर :- प्रदेश के मुखिया विजयादशमी के मौके पर गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर हिस्सा लिया। जिस दौरान उन्होंने हमारे समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को खण्डित करने वालों पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि समाज को बांटकर राष्ट्र को कमजोर करने की कोशिश कर रहे ऐसे लोग रावणी प्रवृति से प्रेरित हैं। उनके अंदर रावण की आत्मा आ गई है। दुष्प्रचार इनका हथियार है। ऐसी प्रवृतियों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से दुष्प्रचार, नशे और विभाजनकारी प्रवृतियों के खिलाफ एकजुट होने का आह्रवान किया।
गोरखपुर की आर्यनगर रामलीला समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम योगी ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, सनातन धर्म की परंपरा और सामाजिक एकता पर बात की। उन्होंने विभिन्न समुदायों और विचारधाराओं के बीच संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया में मुस्लिम से मुस्लिम, कम्युनिस्ट से कम्युनिस्ट और क्रिश्चियन से क्रिश्चियन लड़ रहे हैं।
जबकि भारत सनातन की छाया में हर जाति, संप्रदाय, मत और मजहब को सुरक्षा देने के साथ बिना भेदभाव समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की यह परंपरा उसकी सांस्कृतिक चेतना और समन्वय की भावना को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन मर्यादा, संकल्प और वचन-कर्म की एकरूपता का संदेश देता है। रामलीलाएं इसी आदर्श को गांव-गांव तक पहुंचाने के साथ सामाजिक समरसता की मिसाल प्रस्तुत करती हैं।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी का संकल्प केवल रावण के दस सिर जलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अन्याय, अत्याचार, अधर्म, भ्रष्टाचार, दुराचार, दुष्प्रचार, भ्रम और नशे के खिलाफ संघर्ष को भी मजबूत करना चाहिए। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपरा को सामाजिक समन्वय और सह-अस्तित्व से जोड़ते हुए कहा कि देश की एकता और मजबूती ही उसकी विरासत तथा सम्मान की रक्षा का आधार है।
साथ ही कहा कि जब भारत कमजोर होता है, तब उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर आघात होता है। राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की मजबूती से ही अपनी परंपराओं और सम्मान को सुरक्षित रखने की क्षमता बढ़ती है।
सीएम योगी ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को संकल्प और एकता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान सत्ता नहीं, बल्कि संकल्प था। रामभक्तों ने कठिनाइयों के बावजूद मंदिर निर्माण का विश्वास बनाए रखा। सनातन समाज की एकजुटता ने इस संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि रामलीलाएं समाज को जोड़ने और समरसता का संदेश देने का काम करती हैं।
गांवों में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता, दशरथ, कौशल्या, कैकेयी, हनुमान, सुग्रीव, अंगद, जामवंत, शबरी और निषादराज जैसे पात्र स्थानीय लोग निभाते हैं। इस प्रक्रिया में समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ आते हैं और सामूहिक रूप से परंपरा का निर्वहन करते हैं।सीएम योगी ने कहा कि रामलीला में किसी पात्र की जाति नहीं पूछी जाती।
उसके कार्य, संवाद और समाज के प्रति योगदान को महत्व दिया जाता है। यह परंपरा समानता, एकता और सामाजिक समरसता का आदर्श प्रस्तुत करती है। उन्होंने लोगों से जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजन के बजाय राष्ट्रहित और सामाजिक एकता को प्राथमिकता देने की अपील की।

