6 सूत्रीय मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
जमानियां। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्देश पर अधिवक्ताओं की सर्वोच्च संस्था भारतीय विधिज्ञ परिषद की स्वायत्तता और स्वतंत्रता को खतरा बताते हुए बार एसोसिएशन जमानियां के सभागार में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। अधिवक्ताओं ने एडवोकेट अमेंडमेंट एक्ट 2025 का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि केंद्र सरकार द्वारा भारतीय विधिज्ञ परिषद को निर्देश देने संबंधी धारा 49-वी से संस्था की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है, जिसका शांतिपूर्ण विरोध किया जाएगा। एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए, जिससे अधिवक्ता और उनके परिवार को सुरक्षा मिले‚ परिषदों में निर्वाचित सदस्यों के अतिरिक्त किसी को मनोनीत न किया जाए और उनके लोकतांत्रिक स्वरूप को यथावत रखा जाए‚ परिषदों के सदस्यों के अस्तित्व पर सुझाए गए संशोधनों को तत्काल समाप्त किया जाए‚ प्रदेश के अधिवक्ताओं को 10 लाख रुपये का मेडिकल क्लेम तथा किसी अधिवक्ता की मृत्यु पर 10 लाख रुपये की बीमा राशि प्रदान की जाए‚ पंजीकरण के समय अधिवक्ताओं से लिए जा रहे 500 रुपये के स्टांप शुल्क को प्रादेशिक परिषदों को वापस किया जाए। साथ ही, राज्य सरकार विधिक स्टांप बिक्री से प्राप्त धनराशि का 2 प्रतिशत अधिवक्ताओं के कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करे, जैसा कि केरल सरकार कर रही है। नियम बनाने का अधिकार पहले की तरह एडवोकेट एक्ट के अंतर्गत ही रखा जाए और केंद्र सरकार द्वारा बनाए जा रहे नए रेगुलेशनों को समाप्त किया जाए। बैठक में अधिवक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सरकार इस संशोधन को वापस नहीं लेती है, तो प्रदेशभर में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। अधिवक्ताओं ने मांग की कि केंद्र सरकार एडवोकेट अमेंडमेंट एक्ट 2025 को तुरंत वापस ले। जिसके बाद बार के अध्यक्ष अशोक यादव के नेतृत्व में जिलाधिकारी को संबोधित पत्रक उपजिलाधिकारी अभिषेक कुमार को सौंपा। इस अवसर पर अमर नाथ राम‚ रमेश‚ कमलकान्त राय‚ सुनील कुमार‚ बृजेश सिंह‚ घनश्याम सिंह‚ संजय सिंह‚ रवि प्रकाश सिंह‚ सोहन सिंह‚ फैसल होदा आदि मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता एडवोकेट अशोक कुमार सिंह यादव ने की, जबकि संचालन महासचिव अमरनाथ राम ने किया।

