जमानियां। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के लिए बनाए गए शासकीय आवास कई वर्षो से बदहाल अवस्था में पड़े हुए है। स्थिति यह है कि इन आवासों की दीवारों में अब दरारें भी आने लगीं हैं। शासकीय आवासों में इतने समय से रंगाई पुताई के नाम पर औपचारिकता पूरी की गई है।
वही सरकार जिस प्रकार स्वच्छता अभियान की बात कर रही है वही अयसा लग रहा है की सक्षम अधिकारी सरकारी पैसे का बंदर बाट कर रहें है। और कागजी खानापूर्ति पूरी हो जा रही है। वही स्वस्थ विभाग के कर्मचारीयो को आवास में रहते हुए भय की आशंका बन रही है। इसके साथ ही शासकीय आवासों की स्थिति में सुधार करने कई बार मांग भी की गई है। लेकिन आवासों की स्थिति यह है कि, इनके खिड़की और दरवाजे भी टूट चुके हैं। दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है और ईंटें नजर आने लगी हैं। कई क्वार्टरों में अंदर से पुताई कराई गई। लेकिन कुछ क्वार्टरों के पीछे के हिस्से को छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है। की स्वास्थ्य कर्मियों के आवास जर्जर, छतों से बरसात के मौसम में पानी टपकने लगता है। तथा आवासों के अंदर आंगन में भी पानी भर जाने से स्वास्थ्य कर्मियों को रहने व बाहर निकलने में काफी दिक्कत हो रही है। एमप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में 40.50 वर्ष पहले बने स्वास्थ्य कर्मियों के आवास बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। लेकिन आज तक मरम्मत नहीं हुई। जानकारी के अनुसार वर्ष 1905 में बिल्डिंग तैयार हुई थी। केंद्र परिसर चिकित्सकों के लिए तथा कर्मचारियों के लिए आवास बनवाए गए। अस्पताल का संचालन शुरू होने के बाद सभी कमरों में स्वास्थ्य कर्मी रुकने लगे। अधिकांश स्वास्थ्य कर्मी सरकारी कमरों में परिवार के साथ रहते हैं। इस एवज मे केंद्र प्रभारी डा, रवि रंजन ने बताया कि आवासों की मरम्मत कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को पत्रक भेजा गया है। धनराशि आवंटन होने पर आवासों की मरम्मत कराई जाएगी।

