“आज उन्हीं के जिम्मे कश्तियों की जिम्म्मेदारी है, सलीके से जिन्हें पतवार उठाना भी नहीं आता” – मिथिलेश सिंह गहमरी ने
जमानियाँ / गाजीपुर- क्षेत्र स्थित ग्राम बरुईन में रविवार की शाम सौरभ साहित्य परिषद के तत्वाधान में कवि सम्मेलन सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
फोटो- माँ वीणावादनी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित करते बिहार सरकार के पूर्व प्रधान सचिव रामउपदेश सिंह
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बिहार सरकार के पूर्व प्रधान सचिव रामउपदेश सिंह द्वारा माँ वीणावादनी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। जिस दौरान उन्हें अंगवस्त्रम व पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन के उस हास्य और व्यंग महासमर में देर रात तक काव्य स्वर लहरियों में श्रोता डूबते-उतराते रहे।
कवियों ने समाज के वर्तमान और भविष्य को सुखद करने की सामर्थ्य रखने वाले साहित्य से जुड़े इस आयोजन के प्रति ग्रामीणों ने खूब उत्साह दिखाया। इनके अलावा क्षेत्रीय साहित्यकारों व पत्रकारों को भी अंगवस्त्रम व पुष्पगुच्छ भेंट कर परिषद की ओर से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर रामउपदेश सिंह ने कहा कि जमानियां क्षेत्र की मिट्टी सहित्यशिल्पियों की खान है। इस क्षेत्र ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में महत्ती भूमिका निभाया है। उन्होंने स्वरचित काव्य पाठ कर श्रोताओं की खूब तारीफ बटोरा। पूर्व अपर आयुक्त ओम धीरज ने अपने काव्य से सामाजिक विसंगतियों की ओर ध्यान खींचा।
फजीहत गहमरी ने अपने हास्य व्यंग से सबको गुदगुदाया वही विनय राय बबुरंग ने भोजपुरी हास्य के द्वारा लोगों को खूब हॅसाया। हेमन्त कुमार ने वीर रस की कविताओं से श्रोताओं में जोर भर दिये। कुमार शैलेन्द्र ने नव गीत के माध्यम से श्रोताओं के दिल में जगह बना लिए। अपने मिट्टी में काव्य पाठ कर रहे रविनन्दन सिंह ने मुक्तक व नवगीत के द्वारा अपने लोगों के दिल में जगह बना लिए।
मिथिलेश सिंह गहमरी ने जब ये सुनाया ‘ उन्हीं के जिम्मे कश्तियों की जिम्म्मेदारी है, सलीके से जिन्हें पतवार उठाना भी नहीं आता। संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि हरि नारायण हरीश ने मूल्यों में गिरावट को कुछ यूं बयां किया ‘ सबकुछ हुआ है आजकल बाजार का हिस्सा, जबसे हुआ है आदमी। पद्मश्री यशभारती सहित्यशिरोमणि सब मिलता है, जब हो जाइए दरबार का हिस्सा। महल की आंख में उतरे हैं गुलाबी डोरे, क्या कोई झोपड़ी बस्ती में फिर जवान हुई।
इनके अलावा कई कवियों ने अपनी रचनाओं से ऐसा शमा बांधा की कार्यक्रम के अंत तक श्रोता वाह-वाह करते रहे।कामेश्वर दुबे, गजाधर शर्मा गंगेश, कुमार गौरव, राजकुमार आदि रचनाकारों ने साहित्य प्रेमियों को चिन्तनशील कर दिया।
अध्यक्षता कर रहे अनन्त देव पाण्डेय ने भोजपुरी नव गीत के द्वारा ग्रामीण अंचल के घटित घटनाओं से परिचित करवाया। कार्यक्रम के संयोजक शिक्षक व साहित्यकार राजेन्द्र सिंह ने कहा कि अपनी माटी के प्रतिभाओं का सम्मान अन्य लोगों को भी अपने- अपने क्षेत्र में बेहतर करने की प्रेरणा देगा।
कार्यक्रम में शिक्षक छेदी सिंह, रामअवतार सिंह, पूर्व मंत्री प्रतिनिधि मन्नू सिंह, शिवजी सिंह, संसार सिंह, के.डी. सिंह, मनोज कुमार पाण्डेय, रमेश सिंह, कैलाश प्रजापति, बबलू सिंह, संतोष सिंह, अरविन्द सिंह, राकेश सिंह, पिन्टू सिंह, प्रभात सिंह आदि लोग मौजूद रहे।


