Saturday, May 30, 2026
Homeक्षेत्रीय खबरगंगा घाटों पर धूम धाम से मनाया गया छठ का पर्व

गंगा घाटों पर धूम धाम से मनाया गया छठ का पर्व

जमानिया/गाजीपुर- क्षेत्र के समस्त बलुआ घाट‚ मुन्नान घाट‚ साधू घाट‚ कंकडवा घाट, सतुआनी घाट सहित घाटों पर शुक्रवार को डाला छठ का पर्व धूम धाम से मनाया गया।

सायंकाल प्रारम्भ होते ही व्रती महिलाये भगवान भाष्कर की पूजा और आराधना करने के लिए पूरी आस्था के साथ अपने परिवार संग गंगा तट पर पहुँचकर महिलाओं ने भगवान भाष्कर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पूजा अर्चना आरम्भ किया।

फ़ोटो- छठ पर्व के पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते दिलीप वर्मा 

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को नहाय खाय से शुरू होने वाले व्रत के दौरान छठव्रती स्नान एवं पूजा पाठ के बाद शुद्ध अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण करते हैं। पंचमी को दिन भर ‘खरना का व्रत’ रखकर व्रती शाम को गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन करते हैं इसके बाद शुरू होता है 36 घंटे का ‘निर्जला व्रत’।

छठ महापर्व के तीसरे दिन शाम को व्रती डूबते सूर्य की आराधना करते हैं और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। पूजा के चौथे दिन व्रतधारी उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य समर्पित करते हैं। इसके पश्चात 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है और व्रती अन्न जल ग्रहण करते हैं। इस अर्घ्य में फल और नारियल के अतिरिक्त ठेकुआ का काफी महत्व होता है नहाय खाय की तैयारी के दौरान महिलाएं गेहूं धोने और सुखाने तथा बाजारों में चूड़ी, लहठी, आलता और अन्य सुहाग की वस्तुएं खरीदने में व्यस्त रहती हैं।

छठ पूजा के अंतिम दिन भक्तगण उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद कच्चा दूध व प्रसाद खाकर व्रत का पारण करते हैं जिनमें निर्जल उपवास के अलावा व्रती को सुखद शैय्या का भी त्याग करना होता है। छठ पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे ही रात बिताना है।

इस व्रत को करने वाले लोग ऐसे कपड़े पहनते हैं, जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है। आज भी गाँवों में महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ व्रत करते हैं। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जो लोग इस व्रत को करते हैं उनके यहाँ एक प्रथा और भी देखने को मिलती है कि घर की महिलाएँ इस व्रत को तब तक करती हैं जब तक कि अगली पीढ़ी की विवाहित महिला इसके लिए तैयार न हो जाये।

मान्यता है कि छठ माता सूर्य भगवान की बहन हैं इसीलिए श्रद्धालुगण सूर्य को अर्घ्य देकर  को प्रसन्न करते हैं इसके अलावा माँ दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि छठी मैया संतान सुख प्रदान करने वाली हैं और संतान प्राप्ति तथा संतान की सुख-समृद्धि की कामना के लिए भी छठ व्रत किया जाता है।

दूर दराज से आये श्रधालूओ ने गंगा तट पर ईख गाड़ कर सूर्य देव का पूजन  को श्रद्धालू प्रात: काल उगते सूर्य को अघ्र्य देंगे।

इस पूजा में पूजा के पूजा देवी, किरन देवी, कंचन देवी, कृष्णा देवी, माला, संगीता देवी, इमरीती देवी, सुजाता, रीता देवी आदि सैकडो लोग मौजूद रही।

इस दौरान नगर पालिका की तरफ से सभी  गंगा घाटों पर साफ सफाई पुलिस प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी।

संबंधित खबर

Most Popular

Recent Comments

error: कॉपी करने की कोशिश ना करें, धन्यवाद !