सरकार के करोड़ों खर्च करने के बाद भी गौशालाओ में मर रहे है पशु।
जमानिया- अव्यवस्थाओं से जूझ रहा नगर स्टेशन बाजार स्थित कान्हा गौशाला देख रेख की कार्यप्रणाली में नही हो रहा सुधार। यह एक बहुत बड़ा सवाल है, आखिर सरकार के करोड़ों खर्च करने के बाद भी सक्षम अधिकारी और कर्मचारी गायों की रक्षा नहीं क्यों नहीं कर पा रहे है? सूखा भूसा और उपचार व्यवस्था मिलने के बाद भी गोवंश तड़प-तड़प कर क्यों मरने को मजबूर हैं।

जहाँ एक तरफ योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में गौ हत्या को पाप मानते हुए इस जघन्य अपराध पर रोक लगाई थी, वही दूसरी तरफ गौशालाओं में गायों के खाने के लिए उचित हरा चारा उपलब्ध नहीं और समय समय पर उपचार उपलब्ध नही है।
बता देकी गुरुवार को गौशाला की पड़ताल की गई। जहां मौके कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला । वही कई गोवंश मरे और कुछ बेजान और दुर्व्यस्था की मार झेल रहे थे। साफ सफाई की व्यवस्था तो ठीक दिखाई दी।

जानकारी के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र के स्टेशन बाजार स्थित कान्हा गौशाला में करीब 266 गोवंश रखें गये है। जिसमें से 26 मादा और 240 नर है। हालांकि दोनों को अलग अलग रखने के लिए कोई बेरिकेटिंग नहीं है। कान्हा गौशाला में पड़ताल के दौरान गेट बंद पाया गया। कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। वही चार गोवंश मृत और करीब 5 गोवंश अधमरे अवस्था में पाये गये।
जिसका सुध लेने वाला कोई नहीं था। सब राम भरोसे चल रहा हो , गोशाला में भूसा‚ चारा आदि की पर्याप्त व्यवस्था है लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से गोवंश दम तोड़ रहे है। आस पास के लोगो की माने तो लगभग प्रतिदिन मरे गोवंशों को जेसीबी की सहायता से गौशाला के बगल में बनाये गये कूडा डंपिंग यार्ड में दफना दिया जाता है। कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से गोवंशों की नियमित चिकित्सा जांच भी नहीं होती है।

जिस कारण से गोवंश दम तोड़ रहे है। पड़ताल के करीब 20 मिनट बाद गोशाला के प्रभारी रमेश मौके पर पहुंचे और बताया कि मृत गोवंशों को हटवाया जा रहा है। इस संबंध में अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि पदभार कुछ दिन पूर्व ग्रहण किया गया है। गोवंश यदि कान्हा गोशाला में मृत पड़े थे‚ तो उसकी जांच कर निश्चित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि बेजुबानों के साथ किसी भी कीमत पर अन्याय नहीं होगा।

