जमानियां। ब्लाक मुख्यालय स्थित सभागार में नैनों यूरिया एवं नैनों डीएपी पर आधारित एक गोष्ठी का आयोजन की गई। विभाग से आए वक्ताओं द्वारा बताया गया की उर्वरकों का सफल प्रयोग से किसानों के लिए लाभजनक कृषि का आधार माना गया है।

किसानों की फसल पैदवार समस्या के निदान के लिए गुरुवार को ब्लाक मुख्यालय स्थित सभागार में मुख्य अतिथि ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि संतोष कुशवाहा तथा अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी यशवंत कुमार राव की देखरेख में क्षेत्रीय किसानों की बैठक आहूत की गई। इस दौरान वक्ताओं ने विस्तारपूर्वक किसानों की समस्याओं को लेकर प्रकाश डाला और कहा की उर्वरकों का यदि संतुलित उपयोग न हो, तो वे पर्यावरण के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं। पारंपरिक उर्वरकों का उत्पादन, भंडारण एवं स्थानांतरण, जहां एक प्रमुख चुनौती है, वहीं इनके असंतुलित प्रयोग के दुष्प्रभाव बृहत रूप से देखे गए हैं। इसके साथ ही इनकी उपयोग दक्षता भी दिन प्रति दिन कम होती जा रही है। वक्ताओं ने कहा की उच्च पोषक तत्वों के साथ साथ मृदा और पर्यावरण के साथ अनुकूलता वाले उर्वरकों को विकसित करने की आवश्यकता है। ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि संतोष कुशवाहा ने कहा की नैनो प्रौद्योगिकी गुणात्मक विशेषताओं को बढाने के लिए नैनो उर्वरकों के रूप में एक आशाजनक विकल्प के रूप में तेजी से उभर रही है। कृषि एवं खाद विज्ञान के क्षेत्र में इस प्रौद्योगिकी के विभिन्न घटकों का महत्वपूर्ण योगदान है। नैनो उर्वरक में पोषक तत्वों के नैनो फॉर्मूलेशन शामिल होते हैं, जो रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के संभावित प्रतिकूल प्रभावों के साथ साथ उर्वरक अनुप्रयोग आवृत्ति को भी कम करते हैं। उन्होंने कहा की इसके अलावा, नैनो उर्वरकों के प्रयोग से रासायनिक अवशेष में भी भारी कमी आती है। इससे न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि लागत की भी बचत होती है। कुशवाहा ने बताया कि पर्यावरण हितैषी इफको नैनो यूरिया,इफको नैनो डी ए पी प्रयोग हेतु किसानों से अपील करते हुए कहा की नैनो जैव उर्वरकों के उपयोग से पारंपरिक उर्वरकों के इस्तेमाल में 50-75 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है। खंड विकास अधिकारी यशवंत कुमार राव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा की नैनो उर्वरक पारंपरिक उर्वरकों, मृदा कोलाइड्स और पौधों के भागों से निकाले गए नैनो कण होते हैं। ये 1-100 नैनो मीटर व्यास के आसपास होते हैं। विशिष्ट सतह क्षेत्र और अत्यंत सूक्ष्म आकार होने के कारण, ये नियत्रित एवं धीमी गति से पोषक तत्वों को उन्मुक्त करते हैं। ये मृदा की उर्वराशक्ति, उत्पादकता और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और पोषक तत्व को उपयोग दक्षता में सुधार के लिए जरूरी होता है। राव ने कहा की नैनो सामग्री की उच्च प्रतिक्रियाशीलता के कारण, ये उर्वरकों के साथ परस्पर क्रिया कर पौधों को पोषक तत्वों के बेहतर एवं प्रभावी अवशोषण में सक्षम बनाते हैं। नैनो उर्वरक पोषक तत्वों को लोचिंग व वाष्पीकरण द्वारा होने वाली हानि को कम करते हैं। ये अधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण पोषक तत्वों की जैव उपलब्धता में भी सुधार करते हैं। इसके साथ ही पर्यावरणीय जोखिमों को भी कम करते हैं। मृदा के भौतिक और रासायनिक गुण, गैसीय नुकसान, लौचिंग, अपवाह और उर्वरक विशेषताएं पौधों की पोषक तत्व उपयोग दक्षता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पोषक तत्वों के उपयोग को प्रभावकारिता में सुधार के माध्यम से फसल उत्पादन में वृद्धि स्थाई कृषि और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रमुख स्तभों में से एक है। पूर्व सचिव सरजू कुशवाहा ने बताया कि उर्वरक उपयोग दक्षता को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियों जैसे-फर्टिगेशन, सटीक निषेचन, सौमित उपयोग और पारंपरिक उर्वरकों के एवज में नैनो उर्वरकों के उपयोग की योजना बनाई गई है। पर्यावरणीय अखंडता, पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक स्थिरता के साथ जनसंख्या को बढ़ती खाद्य मांगों को पूरा करने के लिए नैनो प्रौद्योगिकी फसलों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुशवाहा ने बताया कि कृषि के क्षेत्र में नैनो एनकैप्सुलेशन के प्रयोग ने बहुलक मैट्रिक्स के भीतर उर्वरकों के एनकैप्सुलेशन और प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों में उर्वरकों के वाष्पीकरण/गिरावट को रोककर प्रभावकारिता को बढ़ाया है। बीज उपचार सहित कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के अनुप्रयोग के संबंध में विभिन्न रिपोर्ट प्रकाशित की गई हैं। इस अवसर पर रवि शंकर तिवारी, दीपक कुमार सिंह, डा, बृजेश सिंह, एस एफ ए अभिमत पांडेय आदि सहित लगभग 80 किसानों ने प्रतिभाग किया

