हूतियों ने लाल सागर पर किया कब्जा वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहराया संकट।
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य तक पहुंचे विद्रोही, सऊदी अरब की गुहार पर अमेरिका का मदद से इनकार।
अदन / दुबई-: ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह पर कब्जे के एक दिन बाद शुक्रवार को यमन के लाल सागर से लगे तटीय क्षेत्र और संवेदनशील समुद्री इलाकों पर कब्जा जमा लिया।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और व्यापारिक मार्गों में एक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हूतियों के सीधे नियंत्रण से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा गहरा गया है। ईरानअमेरिका जंग के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने के बाद से यह क्षेत्र सऊदी अरब के लिए तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग रहा है।
सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई भी शुरू की है। उसने यहूती ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अमेरिका से मदद भी मांगी लेकिन उसने अनसुना कर दिया। एक मीडिया रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो बार फोन किया और उनसे मदद की गुहार लगाई। लेकिन ट्रंप ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया।
यमन के सरकारी सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को हूती विद्रोहियों ने बाब अलमंदेब जलडमरूमध्य पर स्थित रणनीतिक पेरीम द्वीप पर कब्जा कर लिया। इससे पहले, सऊदी समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सूत्रों ने बताया था कि उनकी सेनाएं पेरीम द्वीप से पीछे हट गई हैं और हूतियों ने मुख्य भूमि के लाल सागर तटीय शहर धूबाब पर भी कब्जा कर लिया हैं, जो इस द्वीप के सामने स्थित है।
हूतियों के फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक विपरीत दिशा में स्थित बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर
पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो इससे अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष में ईरान को एक अहम रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। इससे दूसरे प्रमुख समुद्री गलियारे से होने वाली आपूर्ति कम हो सकती है।
सऊदी की तेल पाइपलाइन से उठता नजर आया धुआं एक अन्य घटनाक्रम में उपग्रह से ली गई तस्वीरों में सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन के आसपास धुआं उठता हुआ
दिखाई दिया। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए अपने कच्चे तेल के निर्यात को मोड़ने का एक बहुत महत्वपूर्ण जरिया रही है।
मक्का पैक्ट का नहीं दिखा असर– पिछले महीने पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का पैक्ट हुआ था, जिसके तहत तीनों देशों में से किसी पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा। लेकिन हूतियों के सऊदी शहरों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के बाद पाकिस्तान ने फिलहाल ऐसा कोई कदम उठाने की पहल नहीं की है।
ईरान बोला-नाकेबंदी खत्म करे सऊदी अरब…मोखा और रणनीतिक द्वीपों पर हूतियों के कब्जे के बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर सऊदी अरब से यमन की नाकेबंदी खत्म करने की मांग की। साथ ही, सऊदी अरब और हूतियों के बीच दोबारा बातचीत शुरू करने की सलाह भी दी है।
बाब अल-मंदेब : ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग- बाब अल-मंदेब का पूरा इलाका ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब ने लाल सागर के इस मार्ग का उपयोग तबसे बढ़ा दिया है जब होर्मुज मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया था।
सीधे तौर पर जंग में नहीं उतरना चाहता अमेरिका…अमेरिका ने सीधे तौर पर सैन्य मदद देने से इनकार कर दिया है क्योंकि वह एक और मोर्चे पर जंग में नहीं उतरना चाहता है। लेकिन सऊदी बलों की मदद के लिए खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डाटा साझा करने पर सहमति जताई है। अमेरिका ने अपने करीब 100 सैन्य सलाहकारों को वहां तैनात कर रखा है।
60%- तक घटी है तेल टैंकरों की आवाजाही हूतियों के हमले शुरू होने के बाद से 12%- वैश्विक व्यापार व ऊर्जा आपूर्ति के लिए लाल सागर प्रमुख मार्ग 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल।
पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों में लगेगी आग-
घरेलू मोर्चे पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें पिछले तीन महीनों से हैं स्थिर । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मूल्य में तेजी ने बिगाड़ी सरकारी विपणन कंपनियों की वित्तीय सेहत ।
महंगा तेल आपकी जेब पर तो बोझ डालेगा ही जानिए इससे और क्या असर पड़ेगा ? पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को एक बार फिर हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।
जबकि भारत जिस कच्चे तेल को खरीदता है, उसका भारतीय बास्केट में..मूल्य लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल तक कंपनियों की बैलेंस शीट में छेद रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, सितंबर के मौजूदा भावों पर सरकारी तेल कंपनियों को, पेट्रोल पर प्रति लीटर 5 रुपये का नुकसान हो रहा है।
डीजल पर यह नुकसान प्रति लीटर 23 रुपये है। घरेलू एलपीजी पर अंडररिकवरी 200 रुपये प्रति सिलिंडर तक पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का 88% से • अधिक कच्चा तेल और 50% प्राकृतिक गैस आयात करता है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैलजुलाई के दौरान देश का कच्चा तेल आयात बिल 56.5 फीसदी बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है।
घरेलू मोर्चे पर पेट्रोल- डीजल की खुदरा कीमतें पिछले तीन महीनों से स्थिर हैं। मई में आखिरी बार चार किस्तों में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53. रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया था लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेजी और कीमतों में स्थिरता के आगे की राह इस बेमेल खेल ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय सेहत बिगाड़ दी है।
क्या ? पहला रास्ता यह है कि यदि खाड़ी संकट लंबा खिंचता है, तो तेल कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए सरकार खुदरा कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी की हरी झंडी दे दे। डीजल में 23 रुपये का अंतर बहुत बड़ा है, जो सीधे माल ढुलाई और खाद्य महंगाई को भड़काएगा।
दूसरा रास्ता यह है कि केंद्र उत्पाद शुल्क में कटौती करे, ताकि लोगों पर बोझ डाले बिना कंपनियों का मार्जिन सुधारा जा सके। हालांकि, इससे राजकोषीय घांटे पर दबाव बढ़ेगा। जब तक तनाव शांत नहीं होता, महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की दोहरी मार से बचा नहीं जा सकता।

