प्रदेश सरकार परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए ख़र्च करेगा 300 करोड़ रुपये।
परिषदीय विद्यालयों में ऑडियो-विजुवल व्यवस्था से हो सकेगी पढ़ाई।
लखनऊ- प्रदेश के 14429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग इस परियोजना पर 300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। हर स्कूल में 2.07 लाख रुपये से डिजिटल संसाधन लगाए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।
प्रस्ताव के अनुसार परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल में तब्दील कर बच्चों को रोचक ढंग से पढ़ाई कराई जाएगी। स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित होने से ऑडियो-विजुअल से छात्र बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे। वे कठिन से कठिन पाठ को आसानी से समझ सकेंगे। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए श्रोटीन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।
संस्था विद्यालयों में 65 इंच की इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, ओपीएस स्लेट, पावर बैकअप सिस्टम, ऑडियो-विजुअल सहायक सामग्री, कक्षा एक से पांच तक के पूरे पाठ्यक्रम का डिजिटल कंटेंट, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जिसमें ई-दीक्षा व ई-विद्या भी मौजूद रहेगी, की सुविधा विकसित करेगी। स्मार्ट क्लास का क्रय व क्रियान्वयन एकीकृत मॉडल के रूप में किया जाएगा। इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और पाठ्यक्रम आधारित डिजिटल कंटेंट उपलब्ध रहेगा।
बनाई गई समिति :— बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा, संयुक्त शिक्षा निदेशक बेसिक (कैंप कार्यालय) व बेसिक शिक्षा के वित्त नियंत्रक की एक समिति गठित की गई है जो परियोजना के निविदा, चयन, संचालन आदि का काम देखेगी।
स्मार्ट क्लास को बेहतर ढंग से स्थापित करने, उसके संचालन और किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट भी स्थापित की जाएगी। नोडल एजेंसी श्रोटीन इंडिया लिमिटेड हेल्प डेस्क, डिवाइस मैनेजमेंट सिस्टम और व्यापक अनुरक्षण की व्यवस्था करेगी।

