Saturday, September 12, 2026
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अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में करीब 145 करोड़ रुपये के  घोटाले में , 53 फीसदी संस्थान फर्जी ।

अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में करीब 145 करोड़ रुपये के  घोटाले में , 53 फीसदी संस्थान फर्जी 1,572 संस्थानों में से 830 निकले फर्जी, मंत्रालय ने सीबीआई को सौंपी जांच।

लखनऊ- अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में करीब 145 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। देश के 34 राज्यों के 100 जिलों में की गई जांच में कई राज्यों में फर्जी लाभार्थी, कागजी संस्थान और छद्म नामों से बैंक खाते सामने आए हैं। जिसमे 1,572 संस्थानों में से 830 यानी 53 फीसदी सिर्फ कागजों पर चलते पाए गए। महज पांच साल में इन संस्थानों वि ने 144.83 करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम दिया। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने इस खुलासे के बाद घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है।

सीबीआई को भेजे पत्र के मुताबिक, यह फर्जीवाड़ा सिर्फ वित्तीय लाभ पाने का मामला नहीं है, बल्कि छात्रवृत्ति के दुरुपयोग के चलते इसमें सुरक्षा का खतरा भी है। मंत्रालय के मुताबिक, फर्जी बैंक खाते बनाकर उन विद्यार्थियों के नाम पर छात्रवृत्ति ली गई, जिनका अस्तित्व ही नहीं था। इतना ही नहीं, इन फर्जी नामों के केवाईसी और फर्जी हॉस्टल के बदले में भी पैसे लिए गए। देश में करीब 1.80 लाख अल्पसंख्यक संस्थान हैं।

इनमें 1.75 लाख मदरसे हैं, जिनमें सिर्फ 27,000 मदरसे ही पंजीकृत हैं और छात्रवृत्ति पाने के पात्र हैं। योजना के तहत कक्षा एक से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले वाले अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है । यह योजना 2007-08 में चालू हुई थी | मंत्रालय का मानना है, यह घोटाला तब ही से चल रहा है । अब तक करीब 22,000 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। बीते चार साल से सालाना 2,239 करोड़ रुपये की छात्रवत्तियां दी गईं।

यूपी के 44 फीसदी संस्थान फर्जी :-

उत्तर प्रदेश : 44 फीसदी संस्थान फर्जी मिले हैं। सबसे अधिक 62 फीसदी फर्जी संस्थान छत्तीसगढ़ में हैं। राजस्थान के 128 संस्थानों की जांच में 99 फर्जी निकलेअसम में 68 फीसदी, कर्नाटक में 64 फीसदी और बंगाल 39 फीसदी जाली संस्थान निकले हैं। केरल मलप्पुरम शाखा से 66 हजार विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां दी गईं। इसमें अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की पंजीकृत संख्या और मौजूदा संख्या का फर्जीवाड़ा है।

जम्मू कश्मीर: अनंतनाग के एक कॉलेज में पंजीकृत विद्यार्थी 5,000 हैं जबकि छात्रवृत्ति 7,000 विद्यार्थियों को दी गई। नौवीं कक्षा में एक मोबाइल नंबर पर 22 बच्चों को छात्रवृत्ति दी गई। एक अन्य संस्थान में छात्रावास न होने बाद भी हर विद्यार्थी ने छात्रवृत्ति ली। एक बालिका कॉलेज में लड़के के नाम से छात्रवृत्ति हड़प ली गई। अगले साल वह छात्र ही गायब हो गया।

यूपी: पांच और जिलों से जुड़े घोटाले के तार-:

छात्रवृत्ति घोटाले के तार प्रदेश की पांच और जिलों से जुड़ रहे हैं। वहां के तीस से अधिक संस्थान की जांच की जद में हैं। आशंका है कि जिस तरह हाइजिया व अन्य संस्थानों ने करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़पी, वही खेल इन संस्थानों में भी किया गया। केंद्रीय एजेंसी (ईडी) के साथ साथ एसआईटी को भी इसकी जानकारी हुई है। केंद्रीय एजेंसी ने अपने स्तर से तफ्तीश शुरू भी कर दी है। पुख्ता सुबूत जुटाने के बाद एजेंसी इन पर कार्रवाई करेगी।

ईडी ने करीब आठ महीने पहले खुलासा किया था कि हाइजिया ग्रुप समेत दस संस्थानों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति हड़पी। इसमें लखनऊ, हरदोई और फर्रुखाबाद के संस्थान शामिल हैं। प्रकरण में ईडी अपने स्तर से हुए हैं सभी घोटालेबाज एक-दूसरे से जुड़े हाइजिया ग्रुप के संचालक घोटाले के मास्टरमाइंड हैं। कई ऐसे आरोपी हैं, जो पहले इस ग्रुप के साथ मिलकर काम करते थे। बाद में संस्थान खोलकर घोटाला किया।

सूत्रों के मुताबिक ये जितने घोटालेबाज हैं वह सभी एक दूसरे से कनेक्टेड हैं। पूरा घोटाला एक ही पैटर्न पर किया गया है। छात्रों के दाखिल किए। खाता खुलवाया। छात्रवृत्ति आई तो तुरंत खाते खाली कर दिए। चूंकि सभी एक दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए जांच के दौरान अन्य जिलों में घोटाला होने के सुराग मिले हैं।

घोटाले की राशि भी , और अधिकारी भी आएंगे रडार परः पुलिस ने जो केस दर्ज किया था वह ईडी की जांच के । आदेश पर हुआ था। जिसमें दावा किया गया था कि सौ करोड़ का घोटाला किया गया है। अब तक की जांच में 65 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। तफ्तीश जारी हैं। हालांकि घोटाले की राशि अभी और बढ़ने की संभावना है।

हाइजिया ग्रुप के तीन संचालकों को जेल भेज चुकी है। वहीं 30 मार्च 2023 को हजरतगंज थाने में शासन के आदेश पर पुलिस ने इस प्रकरण की एफआईआर दर्ज की थी। इसकी विवेचना एसआईटी कर रही है। एसआईटी अब तक पूर्व में गिरफ्तार किए तीन आरोपियों समेत छह लोगों को जेल भेज चुकी है। विवेचना जारी है

सूत्रों के मुताबिक जिस समयावधि में हाइजिया ग्रुप व अन्य ने मिलकर घोटाला किया उसी दौरान पांच और जिलों में इसी तरह का घोटाला करने का सुराग लगा है। इसमें मेरठ, शाहजहांपुर, लखीमपुर, गोंडा और जौनपुर जैसे जिले शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक इससे संबंधित इनपुट केंद्रीय एजेंसी को मिला है। इसलिए जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

नोडल अफसरों की भी जांच नई दिल्ली। सीबीआई जांच के दायरे में नोडल अफसर भी होंगे। पता लगाया जाएगा कि अधिकारियों ने इन संस्थानों अनुमोदन कैसे कर दिया? फर्जी मामलों का सत्यापन कैसे हुआ? कितने राज्यों में वर्षों तक घोटाला जारी रहा? बैंकों लाभार्थियों के फर्जी खाते कैसे खुले ? फर्जी आधार कार्ड केवाईसी की जांच भी चल रही है।

वही राशि केंद्र सरकार की, जिम्मेदारी राज्यों अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति भले ही केंद्र सरकार देती है, लेकिन उसका भौतिक सत्यापन प्रक्रिया राज्य सरकार की मशीनरी पर निर्भर करता है। संस्थानों का पंजीकरण जिला स्तर पर अल्पसंख्यक विभाग में होता है। छात्रवृत्ति के खाते स्थानीय बैंकों में खोले जाते हैं। विद्यार्थियों संस्थानों का सत्यापन भी राज्य सरकार का अल्पसंख्यक विभाग करता है।

 

 

 

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