भारतीय पुरातत्व के भीष्म पितामह बी.बी.लाल जी का निधन।
लखनऊ- भारतीय पुरातत्व के भीष्म पितामह,बी.बी.लाल जी का निधन 10 सितंबर 2022 रात्रि को नई दिल्ली में निधन हो गया। प्रो. लाल का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में बैडोरा गांव में 02 मई, 1921 को हुआ था।
प्रो. बी. बी. लाल को वर्ष 2020 में पद्म भूषण प्रदान किया गया था। सन् 1968 से 1972 तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक थे और उन्होंने भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक के रूप में सेवा की है।
प्रो. लाल ने यूनेस्को की विभिन्न समितियों में भी काम किया है। पांच दशकों तक फैले अपने कैरियर में प्रो. लाल ने पुरातत्व विज्ञान के क्षेत्र में बेशुमार योगदान दिया। प्रो. लाल को 1944 में तक्सिला में सर मोर्टिमर व्हीलर द्वारा प्रशिक्षित किया गया था और बाद में वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में नियुक्त हुए।
प्रो. लाल ने हस्तिनापुर (उप्र), शिशुपालगढ़ (ओडिशा), पुराना किला (दिल्ली), कालिबंगन (राजस्थान) सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई की। 1975-76 के बाद से, प्रो. लाल ने रामायण के पुरातात्विक स्थलों के तहत अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, श्रंगवेरपुरा, नंदीग्राम एवं चित्रकूट जैसे स्थलों की जांच की।
प्रो. लाल ने 20 पुस्तकें और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में 150 से अधिक शोध लेख लिखे हैं। कल रात्रि को भारत के एक महान भूस्तर शास्त्री और इतिहासकार प्रो.बी बी लाल का जन्म 02 मई 1921 को झांसी में हुआ था । मृत्यु के समय उनकी मृत्यु १०० वर्ष से अधिक आयु में हुई । पर इस बारे में मीडिया अर्थात टीवी चैनल्स अथवा दूसरे संचार साधनों में कोई खबर नहीं थी ।
रामायण, महाभारत, वेद उपनिषद आदि को स्कूली किताबों में एक मायथोलोजी बताया गया, राम कृष्ण को काल्पनिक बताया गया, इन सभी को प्रो. बी बी लाल ने झुठा साबित किया था।
राम मंदिर जो अभी अयोध्या में बन रहा है उसका मूल कारण बी बी लाल थे जिन्होने ये साबित किया था कि राम मंदिर नामक देवालय वही था जिसे बाबर ने तोड़ दिया था।।
प्रो. बी बी लाल के कारण ही भारत के हिंदुओ को पता चला है कि रामायण महाभारत कोई काल्पनिक बात नही है। सच में घटित हुई घटना थी, बी बी लाल ने ही द्वारिका नगरी पर शोध किया था। उन्होंने ही समुद्र में द्वारिका की शोध करने बाद उसपर रिसर्च की थी। भारत के रामायण और महाभारत काल के अवशेषों को खोज कर के उन्होंने ढेरो रिसर्च की थी।
उनकी इस सेवा के कारण ही आज हम लोग उन अंग्रेजी और मुगलों के गुलाम लेफ्टिस्ट हिंदूओ के मुंह बन्द करवा पाए है जो राम को काल्पनिक साबित करना चाहते थे। आर्य लोग बाहर से आए थे इस थ्योरी को भी झूठा साबित कर दिया था। एक भी मिडिया या न्यूज पेपर में उनके निधन का कोई समाचार नही दिखाई दिया। जबकि सब के सब ब्रिटेन की रानी के पीछे पड़े थे।
प्रो. बी बी लाल की एक पुस्तक है:-
“इंद्रप्रस्थ : द बेकिंग टाइम ऑफ दिल्ली”और एक है….
“टाइम्स ऑफ ऋग्वेद एरा पीपल्स” (ऋग्वेद के समय के लोग और व्यवस्था) और कई सारी पुस्तके है जिसे पढ़ना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है और इतनी अच्छे तरीके से उसमे साक्ष्य दिए गए है कि पुस्तक को १०/२० बार पढ़ने का मन हो ही जाएगा।

