प्रधानमंत्री राहत कोष की धनराशिया चढ़ गयी घोटालो की भेंट- राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारत हिंदू महासभा देवेन्द्र पाण्डेय
एक तरफ जब देश के प्रधानमंत्री महोदय भिखारी से लेकर नौकरी पेश और व्यापारी, किसान तक के जीवन को पारदर्शी बनाने में लगे है, काले धन को समाप्त करने के मुहिम का परिणाम नोट बंदी देश का ऐतिहासिक निर्णय था।
उन्ही प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी ने भारत को दो हिस्सो मे विभाजित कर दिया एक जानता नंगी रहे उसका कुछ भी छुपा ना ही, *जानता की रोटी और लगोटो भी गिनी जाने लगी* इस लिए डिजिटल इंडिया हो गया, दूसरी तरफ देश बिक रहा है जिसकी खबर सौदा होने के बाद लगती है, ऐसा व्यवहार सरकार के आचरण पर संदेह भर पैदा नही करता बल्कि संदेह की पुष्टि भी करता है,कितने आश्चर्य की बात है की देश के हितार्थ प्रधानमंत्री कोष के धन की जानकारी उस जनता को नहीं है।
जिसके लिए ये कोष है,ऐसा लगता है की देश मोदी जी का गुलाम है, वो जितना चाहते है जानता सिर्फ उतना ही जाने उससे ज्यादा जानने की कोशिश अपराध है,ऐसी स्थिति में देश का चिंतन और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, ज्ञात हो की राम जन्म भूमि के चंदे में हमने 14 सौ करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था,जिस पर सफाई देने का साहस भाजपा,आरएसएस और वीएचपी के धुरंधरों ने नही जुटाई, सिर्फ मंदिर चंदा घोटाले में अशोक सिंघल ने ही हमसे संवाद किया था ,दोबारा अयोध्या में ही जन्म भूमि के नाम पर जमीन खरीदी घोटाला सब के सामने है।
ऐसे में कैसे मानले की प्रधानमंत्री कोष में सब कुछ ठीक है, सरकार को चाहिए कि घोटलो के आरोप लगे और सिद्ध हो उससे पहले देश की जनता के हित के कोष को जनता के सामने हिसाब सहित रख देना चाहिए, बरना ये भारत देश है साहब जिसने अपने ईश्वर के चरित्र पर भी प्रश्न खड़े किए है । वो गोपनीय कोष की तिजोरी पर सेंध की बात तो करेगे ही
देवेन्द्र पाण्डेय
राष्ट्रीय महासचिव
अखिल भारत हिंदू महासभा

