Friday, July 3, 2026
Homeक्षेत्रीय खबरगाज़ीपुर के गांधीपुरम, बोरशिया स्थित सत्यदेव इंटरनेशनल स्कूल में बड़े धूमधाम से...

गाज़ीपुर के गांधीपुरम, बोरशिया स्थित सत्यदेव इंटरनेशनल स्कूल में बड़े धूमधाम से मनायी गयी महाराजा राणा प्रताप सिंह जी की जयंती।

गाज़ीपुर के गांधीपुरम, बोरशिया स्थित सत्यदेव इंटरनेशनल स्कूल में बड़े धूमधाम से मनायी गयी महाराजा राणा प्रताप सिंह जी की जयंती।

गाज़ीपुर- स्थानीय क्षेत्र के गांधीपुरम, बोरशिया स्थित सत्यदेव इंटरनेशनल स्कूल में शौर्य और पराक्रम प्रतीक महाराजा राणा प्रताप सिंह जी की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई गई I

फ़ोटो- गाज़ीपुर  के गांधीपुरम, बोरशिया स्थित सत्यदेव इंटरनेशनल स्कूल में महाराजा राणा प्रताप सिंह जी की जयंती दीप प्रज्वलित करते प्रधानाचार्य  चंद्र सेन तिवारी ।

विद्यालय के प्रधानाचार्य  चंद्र सेन तिवारी ने अपने सभी शिक्षक गण, शिक्षणेतर कर्मचारी गण तथा सभी विद्यार्थियों सहित शौर्य शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर सभी देशवासियों को कोटि-कोटि बधाई एवं शुभकामनाएं दिए I

उक्त पावन अवसर पर विद्यालय के उप प्रधानाचार्य श्री आवेश कुमार ने सभी विद्यार्थियों को ‌‌‌‌‌‌‌महाराणा प्रताप सिंह जी के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई 1540 ईस्वी में कुंभलगढ़ राजस्थान में हुआ था उनके पिताजी श्री महाराणा उदय सिंह तथा माता जी रानी जीवत कंवर थे ।

महाराणा प्रताप जी का संपूर्ण शासनकाल 1568 से 1597 ईस्वी के बीच रहा । महाराणा प्रताप द्वारा लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध जन्म जन्मांतर पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन्त रहेगा। महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था । उन्होंने इतिहास में अपना नाम अजर अमर कर दिया ।

महाराणा प्रताप ने धर्म एवं स्वाधीनता के लिए अपना बलिदान कर दिया। सन 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में करीब 20,000 राजपूतों को साथ लेकर महाराणा प्रताप ने मुगल सरदार राजा मानसिंह के 80000 की सेना का सामना किया। महाराणा प्रताप के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था जिसका नाम था चेतक । इस युद्ध में अश्व चेतक की भी मृत्यु हुई हो गई।

शत्रु सेना से घिर चुके महाराणा प्रताप को शक्ति सिंह ने बचाया यह युद्ध केवल 1 दिन चला परंतु इसमें 17000 लोग मारे गए। महाराणा प्रताप ने कई वर्षों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ भी संघर्ष किया ।वह इतने स्वाभिमानी थे कि वह कहते थे हम हैं राणा प्रताप भले ही घास की रोटियां खाएंगे।

मगर किसी जुल्मी के आगे मस्तक नहीं झुकाएंगे। इस सूक्ति को मस्तिष्क में रखते हुए महाराणा प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता को स्वीकार नहीं किएI मेवाड़ की धरती को मुगलों के आतंक से बचाने वाले ऐसे वीर सम्राट शूरवीर राष्ट्र गौरव पराक्रमी साहसी राष्ट्रभक्त को शत शत नमन है I

उक्त अवसर पर सत्यदेव ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेस के काउंसलर  दिग्विजय उपाध्याय, सत्यदेव डिग्री कॉलेज के निदेशक अमित रघुवंशी तथा सत्यदेव इंटरनेशनल स्कूल परिवार के सभी सदस्य उपस्थित थे

 

संबंधित खबर

Most Popular

Recent Comments

error: कॉपी करने की कोशिश ना करें, धन्यवाद !