Monday, June 1, 2026
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भगवान चित्रगुप्त का कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया दिन किया गया पूजन और अर्चना।

भगवान चित्रगुप्त का कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया दिन किया गया पूजा-अर्चना।

नंदगंज (गाजीपुर) कायस्थ समाज के लोगों हिंदू धर्म में भगवान चित्रगुप्त का कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया दिन बड़े हर्षोल्लाश के साथ पूजन किया गया।यह कायस्थ समाज के लोगों के लिए भी यह काफी महत्वपूर्ण दिवस है। पंचमहापर्व के दूसरे दिन यानि कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया के दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विधान है, लेकिन इस साल तिथियों के घटाव-बढ़ाव और सूर्य ग्रहण के चलते यह पर्व दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है. सनातन परंपरा में भगवान चित्रगुप्त को सभी प्राणियों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला माना गया है।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त पृथ्वी पर किसी भी प्राणी के जन्म लेने से लेकर मृत्यु तक का सारा लेखा-जोखा उसके कर्मों के अनुसार अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं. आइए आज भगवान चित्रगुप्त की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि जानते हैं।

आज के दिन गुरुवार को कायस्थ समुदाय के लोगों ने भगवान श्री चित्रगुप्तजी के चित्र के समक्ष कलम-दवात रखकर उनकी विधिवत पूजा अर्चना की।स्मरण रहें कि कायस्थ समाज के लोग यम द्वितीया के मौके पर अपने प्रेरणास्रोत भगवान श्री चित्रगुप्तजी का पूजा करने से पहले कलम को हाथ नहीं लगाते है।

कहा जाता है कि यमराज के दरबार में श्रीचित्रगुप्त महाराज को मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखने वाला माना जाता है। इसी लेखा जोखा का चित्रगुप्त जी द्वारा आकलन करके पाप- पुण्य का निर्णय निर्धारित होता हैं। चित्रगुप्त पूजा के दिन कायस्थ लोग लेखनी एवं कलम की पूजा करते है और जीविका को सुखमय बनाने का चित्रगुप्तजी से आशीर्वाद माँगते हैं।

इसको नंदगंज बाजार सहित क्षेत्र के बरहपुर , सिहोरी, सिरगिथा, नारी पचदेवरा तथा सौरम,डण्डापुर आदि गांवों में कायस्थ बंधुओं द्वारा धूमधाम से भगवान श्रीचित्रगुप्त की पूजा विधि- विधान से की गई और आसपास भाई बन्धुओं में प्रसाद वितरण किया गया।

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