जमानिया दिलदारनगर मार्ग और जमानिया दरौली मार्ग हुआ जनप्रतिनिधियों के ठगी का शिकार।
गाज़ीपुर के सातों विधानसभा से आखिरकार क्यो चली गयी भाजपा सरकार अगर समीक्षा किया जाय तो पता चलेगा कि विकास का सपना दिखाकर सत्ता में आयी इस सरकार ने विकास के नाम पर लोगो के साथ धोखा किया है। जिस प्रकार से वर्तमान सरकार वर्ष 2014 में जिस प्रकार से विजय घोष के साथ केन्द्र से लेकर उत्तर प्रदेश में आगमन से लेकर वर्ष 2022 तक यह सरकार अपने विकास कार्यो के नाम का डंका बजा रही है।

लेकिन भारतीय जनता पार्टी के विकास की झड़िया की वर्षा की कथनी और करनी में कितनी सत्ययता हैं। वह आपको ज़मानिया की बदहाल सड़क ही बता देंगी। वर्तमान सरकार की विकास गाथा केवल हवाहवाई साबित हो रहा है। वर्तमान सरकार के आगमन और अच्छे दिन की सुरुवात की राह देख रहा जमानिया दिलदारनगर मार्ग और जमानिया दरौली मार्ग की आँखे अब थक सी गयी है।
मानो अव वह आँखे अपनी दुर्दशा पर फूट-फूट कर रो रही है। और जनता के उन जनप्रतिनिधियों से सवाल कर रहा है कि मेरे इस हालत का जिम्मेदार कौन है। यह प्रश्न किससे यह सवाल करें ? कौन देगा उत्तर यहाँ केवल “अँधरे नगरी और चौपट राजा” वाली व्यवस्था चल रही है। यह वह उत्तर प्रदेश है जहाँ विकास के नाम पर जिन्दा लोगो को तो ठगा ही जाता लेकिन अब विकास के नाम पर क्षेत्र के मार्गो को भी ठगा जा रहा है।
हम जानते है कि प्रदेश में विधान सभा का चुनाव हो या राज्य सभा चुनाव आते ही जनता के प्रतिनिधि आम जनता से क्षेत्र में विकास करने का वादा करते हैं, लेकिन कोई अपने वादे को पूर्ण नही कर पाता मालूम होगाल कि चुनाव जीतने के बाद विकास तो दूर वह प्रतिनिधि ऐसे गायब हो जायेगे जैसे कि ” गधे के सर से सिंघ, हम ऐसे ही जनप्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

जो केवल समाज का विकास छोड़कर केवल अपना विकास करते है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में दो बार पूर्ण बहुमत से आयी लेकिन ज़मानिया क्षेत्र में सड़को का विकास नहीं पूर्व विधायक ने किया नही और नही अब वर्तमान विधायक आखिरकार विकास कार्य का जिम्मेदारी किसके सर होंगी।
ज़मानिया की सड़कों के बदहाल स्वरूप पर बुलडोज़र बाबा की क्यो नहीं हैं नज़र-
जी हाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में दो बार पूर्ण बहुमत से बनने के पूर्व से ही जमानिया दिलदारनगर मार्ग और जमानिया दरौली मार्ग की अपने बदहाल और जर्जर हालत पर वर्षो से अंशू बहा रहा है। वहीं यह मार्ग अपने बदहाल और जर्जर हालत के बदलने की राह देख रहा हैं।
यह अपने बदहाल रूप के वर्तमान सरकार में बदहाली के खत्म होने औऱ अपने अच्छे दिन आने की आश लगाये बैठा है कि मेरे अच्छे दिन कब आयेंगे। लेकिन कई सरकारे आयी और चली गयीं लेकिन इस मार्ग के दुखों को कम नही किया। बदहाल मार्गो की हाय ने गाज़ीपुर के सातों विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के नक्कारो को सत्ता के मद में चूर जनप्रतिनिधियों को जड़ से उखाड़ फेंका। भारतीय जानत पार्टी के दिग्गजों के धराशायी हो जाने पर यह शब्द
कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। वा खाए बौराय जग, या पाए बौराय।।
शब्द का पहला अर्थ होता है सोना अर्थात स्वर्ण,और… दूसरा अर्थ होता है धतूरा,जो एक प्रकार का फल होता है,जिसे खाने से नशा हो जाता है। उनका मानना है की – सोने में धतूरे से “सौ गुना” अधिक नशा होता है क्योंकि, धतूरे का सेवन करने से तो आदमी केवल कुछ मिनटों या घंटों के लिए ही मदहोश रहता है लेकिन धन का नशा जीवन भर बना रहता हैं।मात्र उसका प्राप्त होना ही सिर चढ़कर बोलने लगता है और जीवन की अन्य गतिविधियों पर भी उसका चढ़ा हुआ रंग तरह-तरह से दिखाई देता रहता है।
यही कारण था कि वर्ष 2016 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद क्षेत्रों के जन प्रतिनिधि विकास के स्थान पर लोगो को मूर्ख बनाने लग गए लेकिन जनता ने 2022 के विधानसभा चुनाव में नकार दिया और गाज़ीपुर के सातों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की हार हुई।
गाज़ीपुर ज़िले में भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों को भी यह मालूम था कि अब हमारी सरकार नहीं गिरने वाली हैं। जनता तो मुर्ख और मूढ़ है 500 रुपया और एक शीशी शराब लेकर अपना बहुमूल्य मत हमें देकर सत्ता की कुर्सी पर बैठा देंगी। लेकिन सत्ता की कुर्सी पर बैठने के बाद धतूरे के नशे में बैठे जनप्रतिनिधियो की नींद अभी तक नही टूटी है।
वही क्षेत्र के वाहन चालकों ने बताया कि हम लोग इस मार्ग पर करीब वर्षो से चल रहे है लेकिन यह मार्ग कभी भी अच्छी तरह बन नही पाया 2011 में समाजवादी की सरकार से लेकर 2022 ने वर्तमान सरकार में आये जान प्रतिनिधियो विकास के नाम पर केवल जनता को ठगा है।

