आधुनिकीकरण होेने क बाद भी नहीं ‚खत्म हो रहा हैं एआरटीओ गाजीपुर के दफ्तर मे भ्रष्टाचार का खेल।
गाजीपुर– सरकारी विभागाे से भ्रष्टाचार का खात्मा करने के लिए सरकार ने अथक प्रयास कर रहीं हैं लेकनि भ्रष्टाचार खत्म होने को नाम हीं नहीं ले रहीं हैं। सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार किस कदर प्रवेश कर चुका है कि- उसके रोकने के अबतक के सभी उपाय नाकाफी हो चुके हैं. ताजा मामला गाजीपुर के एआरटीओ दफ्तर का है।
जहाँ अब कहने को तो लगभग सभी आवेदन आनलाईन हो चुकें हैं. इसलिए घूस और भ्रष्टाचार के सभी तरीके बंद हो जाने चाहिए. इस विभाग और कार्यालय के सभी कार्य नियमानुसार होने चाहिए. लेकिन होता ठीक उल्टा ही है।भ्रष्टाचारियों, दलालों और इस करप्ट सिस्टम ने इसमें भी छेद कर, नयें तरीकों को इजाद कर लिया है.यदि आप को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने हैं और ड्राइविंग टेस्ट तथा मानक परीक्षण से बचने है तो आप सीधे आनलाईन आवेदन के बाद दलालों से मिलें।
यह दलाल, सिस्टम के करप्ट बाबूओं और संबंधित को मुंह मांगा चढ़ावा चढ़ाकर बिना टेस्ट और परीक्षण से गुजरे ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी करा देगें.। जबकि नियमानुसार यह सभी टेस्ट और परीक्षण विभाग में उपस्थित होकर आवेदक को कराने होतें हैं।और जबतक आप इसमें उत्तीर्ण न हो, लाइसेंस नहीं जारी होने चाहिए. लेकिन होता है ठीक इसके विपरीत. बस, आप के पास उनकी जेब गरम करने की क्षमता हो। यह सब रोजाना होता है और सिस्टम के साथ, उसके आंखों के सामने उसकी मिलीभगत से होता है।
और जिम्मेदार अधिकारी इस भ्रष्टाचार में अपनी हिस्सेदारी लेकर मौन धारण कर लेते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इस तरह के भ्रष्टाचार पर जिम्मेदार पदों पर बैठे अफसर अपनी जिम्मेदारी से मुंहमोड, उसी में आकंठ कब तक डूबे रहेगें, ऐसे में योगीराज का भ्रष्टाचार कैसे कम होगा. यह सवाल है?

