दुसरो को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ताओं को ही नहीं मील रहा न्याय,बार काउंसिल उत्तर प्रदेश अध्यक्ष द्वारा लिखित पत्र द्वारा राजनैतिक दलो से अधिवक्ताओं के लिए मुफ्त ईलाज और मुआवजे की मॉंग।
प्रयागराज (इलहाबाद) – कोविड–19 महामारी के कारण देश की आर्थिक स्थिति असन्तुलित हो जाने के कारण इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में पड़ा है किसके फलस्वरूप लोगों को अनेको प्रकार की समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान दौर में अपनी समस्याओं को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल द्वारा पंजीकृत लगभग चार लाख अधिवक्ताओं जो उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ व जनपद न्यायालयों में विधि व्यवसाय कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश का अधिवक्ता समाज न्याय की रक्षा व समाज के पीड़ित व शोषित वर्ग को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान करता रहा है।
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल का यह विधिक दायित्व है कि वह अधिवक्ता हितों के लिए सरकार से सामंजस्य बनाकर कलाकार पहाड़ी योजनाएं बनाएं और अधिवक्ताओं के हितों की सुरक्षा एवं प्रतिनिधित्व करें उक्त संदर्भ में श्रीश कुमार मेहरोत्रा चेयरमैन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में निम्न बिंदुओं पर राजनीतिक दलों को विचार करने हेतु पत्र लिखा।
अधिवक्ताओं के दुर्घटनाग्रस्त होने या गंभीर बीमारी की दशा में 10लाख रुपए तक की कैशलेस चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए वह कोरोना संक्रमण से मृत अधिवक्ता के परिजनों को ₹10लाख की एकमुश्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण की तिथि से 3 वर्ष तक ₹10हजार प्रति माह की दर से प्रोत्साहन भत्ता दिया जाए ।40 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में न्यायिक व्यवस्था में निरंतर अपना सहयोग देने वाले अधिवक्ताओं को न्यूनतम 25000 मासिक जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाए।
न्यायिक अधिकारियों की भांति अनुभवी अधिवक्ताओं को विभिन्न अधिकरण आयोग व मध्यस्थता के मामलों में अधिवक्ताओं को नियोजित किया जाए, प्रदेश जिला व तहसील मुख्यालयों में नो प्रॉफिट नो लॉस के आधार पर अधिवक्ताओं को आवास विकास व विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड आवास उपलब्ध कराया जाए।
प्रदेश के अधिवक्ताओं को आवास कार्यालय लैपटॉप व वाहन के लिए ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जाए। न्यायालय परिसर की सुरक्षा प्रदान करते हुए अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू किया।

