Tuesday, September 15, 2026
Homeसम्पादकीयएनडीए शासित देश के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी...

एनडीए शासित देश के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) लागू करने का फैसला।

एनडीए शासित देश के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) लागू करने का फैसला।

दिल्ली- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों कहा कि भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी कानून बना लिया जाएगा। अमित शाह की इस घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल गर्म है।इसको लेकर बिहार से मुखर आवाज आई है. भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में हिस्सेदार जेडीयू ने कहा है कि बिहार में यूसीसी कानून नहीं बनेगा। इस वक्त देश की 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं।

हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है और मुझे विश्वास है कि भाजपा-राजग शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। लेकिन, आज हम बात कर रहे हैं कि ये यूसीसी का मसला आया कहां से दरअसल, करीब चार दशक पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक चर्चित फैसले में यूसीसी की जरूरत पर जोर दिया था।

उसके बाद उसने कई अन्य फैसलों में इसकी जरूरत बताई लेकिन राजनीतिक नफा-नुकसान के चलते सरकारें कुंडली मारकर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर बैठी रहीं। यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब देश के नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत, गोद लेने और परिवार से जुड़े दूसरे सिविल मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था बनाना है।

इसका संवैधानिक आधार अनुच्छेद 44 है. हालांकि यह मौलिक अधिकार नहीं है। यह संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है। यानी इसे लागू कराने के लिए कोई व्यक्ति सीधे अदालत में दावा नहीं कर सकता। कानून बनाना संसद या विधानसभाओं का काम है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट पिछले चार दशकों में कई बार यह सवाल उठा चुका है कि आखिर अनुच्छेद 44 को लागू करने की दिशा में आगे क्यों नहीं बढ़ा गया।

यूसीसी पर सुप्रीम कोर्ट की सबसे चर्चित टिप्पणियों में पहला नाम मोहम्मद अहमद खान वाया शाह बानो बेगम का आता है. यह मामला 1985 का है। यह एक मुस्लिम महिला के गुजारा भत्ता यानी मेंटेनेंस के अधिकार से जुड़ा था। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 44 का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रावधान अब तक प्रभावी नहीं हो सका है।

कोर्ट ने माना कि अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण पैदा होने वाले विरोधाभासों को खत्म करने और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने में एक कॉमन सिविल कोड मदद कर सकता है. साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि यूसीसी बनाना सरकार और विधायिका का काम है. यही वह फैसला था जिसने यूसीसी को देश की राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े संवैधानिक मुद्दे के तौर पर स्थापित कर दिया।

 

 

संबंधित खबर

Most Popular

Recent Comments

error: कॉपी करने की कोशिश ना करें, धन्यवाद !