कलमबंद हड़ताल : एडवोकेट बिल के खिलाफ तेज हुआ अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन
जमानियां (गाजीपुर) : एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में स्थानीय बार भवन में मंगलवार की सुबह 11 बजे बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं की बैठक हुई।अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने सर्व सम्मति से कलमबंद हड़ताल करने का निर्णय लिया।तत्पश्चात राष्ट्रपति को संबोधित सात सूत्रीय मांग पत्र एसडीएम अभिषेक कुमार को सौंपा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा कि एडवोकेट अमेंडमेंट बिल अधिवक्ताओं के हितों को सीधे-सीधे प्रभावित कर रहा है तथा अधिवक्ताओं को सरकार पूरी तरह से अपने बंधन में रखना चाहती है। सरकार द्वारा देश के अधिवक्ताओं को विकलांगता की
ओर ले जाने के लिए एडवोकेट एक्ट 1961 में संशोधन हेतु एडवोकेट अमे्डमेंट बिल तैयार किया है। जिसमें एडवोकेट एक्ट के धारा 4 में जो संशोधन प्रस्तावित है, उसमें बार काउंसिल में तीन सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नामित होंगे यानी धारा 4 में संशोधन के बाद बार काउंसिल में सरकार का सीधें दखल हो जायेगा।वही धारा 35ए प्रस्तावित किया गया है कि कोई अधिवक्ता / बार एसोसिएशन हड़ताल नहीं कर सकता यानी न्यायिक कार्य से विरत नहीं रह सकता तथा यह भी प्रस्तावित है
कि अगर किसी वाद में खिलाफ निर्णय आता है तो वादकारी अपने अधिवक्ता के विरूद्ध शिकायत दर्ज करा सकता है जो आपराधिक वाद के रूप में चलेगा।धारा 26ए के तहत प्रस्तावित है कि प्रस्तर 2 में उल्लिखित प्रस्तावित संशोधन का 2 उल्लंघन करने पर संबंधित अधिवक्ता को उसके राज्य के एडवोकेट पंजीकरण से
उसका पंजीकरण निरस्त कर दिया जायेगा।सुप्रिम कोर्ट अथ्वा हाईकोर्ट के पूर्व जजों द्वारा किया जायेगा। जबकि उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता बराबर उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के सुरक्षा हेत एडवोकेट प्रोटेवशन एक्ट लागू करने के लिए सरकार से मॉग कर रहे हैं जिस पर हीला हवाली सरकार द्वारा बराबर किया जा रहा है। जबकि आये दिन अधिवक्ताओं की हत्याएं हो रही हैं। अधिवक्ताओं द्वारा बराबर माँग होती रही है कि
अधिवक्ताओं को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाय, जिससे अधिवक्ता भी अपना ईलाज करा सकें। सरकार द्वारा बुजुर्ग अधिवक्ताओं की जो न्यायालय आने में असमर्थ,अशक्त हैं उन्हें एक पेंशन के रूप में सम्मान राशि दिया जाय, जिससे वे अपना भरण-पोषण कर सके। युवा अधिवक्ताओं को पांच वर्ष तक इसी तरह पांच हजार
रूपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि दिया जाय जिससे उनको आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

इन सब मांगों पर ध्यान न देकर सरकार ऐसे संशोधन एडवोकेट एक्ट में प्रस्तावित्त किया है जो अधिवक्ताओं को स्वतंत्र रूप से वकालत करने, अपने हितों की रक्षा करने में पंगु बना देगा, जिसका हम अधिवक्तागण पूर्ण विरोध करते हैं और पर्ण सम्मान पूर्वक महामहिम जी से आग्रह करते हैं कि सरकार को उपरोक्त संशोधन जो प्रस्तावित है उसे निरस्त करने का आदेश दे।इस मौके पर अधिवक्ता अमरनाथ राम ,गोरख नाथ सिंह,रवि प्रकाश ,मेराज हसन,सोहन सिंह यादव,बृजेश ओझा,जयप्रकाश राम,ज्ञानसागर श्रीवास्तव, सुनील कुमार,मिथिलेश प्रताप सिंह,मुनेश कुशवाहा आदि रहे।

