गांगी तट स्थित बरहपुर देवीमाई मंदिर बना रमणिक स्थल : नवरात्र में लगती है भक्तों की भारी भीड़।
नंदगंज :- बरहपुर ग्राम सभा में वैसे तो बहुत से मंदिर हैं। लेकिन ऐसे कई मंदिर भी हैं, जिनको लेकर लोगों के बीच अलग ही महत्व है। उनमें से एक गांगी नदी तट स्थित देवीमाई का मंदिर है। देवी माईमंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। बताते है कि देवी मंदिर की मूल प्रतिमा को मुगल शासक हुमायूं ने बरहपुर पड़ाव के बागीचे में ठहराव के दौरान उठवाकर कुछ दूरी पर बह रही गांगी नदी में फेंकवा दिया था।

वह प्राचीन देवी माई की मूर्ति कई वर्षो बाद गांगी नदी से पुनः मिल गयी। उसे बरहपुर गांव के लोगों ने गांगी तट पर स्थित मंदिर में स्थापित करके पूजा पाठ करनी शुरु कर दी। उस स्थल पर चार पांच इमली के वृक्ष लगा दिये। इमली के वृक्ष बड़े होने पर वह स्थान रमणीक हो गया और गाय भैंस चराने वाले वहां मंदिर पर बैठकर आराम करते थे। वहां पर आने वाले लोगों की मनोकामना मां पूरी करने लगी।
जिससे दिन प्रतिदिन लोगों की आस्था बढ़ने लगी।इसी बीच आजादी के बाद करीब 60 वर्ष पूर्व मूर्ति चोरों ने रात में उस प्राचीन देवी माई की मूर्ति को गाड़ी पर लादकर उठा ले गये। तत्पश्चात बरहपुर गांव के ग्रामीणों खासकर स्व० जितेन्द्र सिंह तथा स्व०रविन्द्र सिंह ने आगे आकर अनेक लोगों से सहयोग लेकर देवी माता का नये मंदिर में नई भव्य मूर्ति लगवाकर प्राण प्रतिष्ठा कराया। इसके बाद अलग-अलग जगहों के भक्त आकर देवी माता की आराधना करते हुए मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। उनकी मनोकामना भी पूर्ण होने से दिन-प्रतिदिन ख्याति बढ़ती जा रही है।
आज यहां पर भव्य मंदिर के साथ पुजारी के रहने का स्थान, पहलवानों के अभ्यास हेतु अखाड़ा बनने के साथ लोगों के लिये पेयजल तथा शौचालय की व्यवस्था भी हो गयी है। अब भी मुगल आक्रांता द्वारा खंडित की गयी मूर्तियों के अवशेष आज भी परिसर में पेड़ के नीचे मौजूद हैं। आज पत्थर से निर्मित मूर्ति की जीवंतता तथा स्थान मन को आकर्षित कर लेती है। नवरात्रि व सूर्यषष्ठी पर यहां जबर्दस्त भीड़ होती है।
अब यहां पर धीरे धीरे भव्य मंदिर बनने के साथ रमणीय स्थान बन गया है। डाला छठ पूजा पर यहां कई गांवों की बीसों हजार महिला पुरुष छठ पूजा करते है। बरहपुर गांव व आसपास के लोग शुभ कार्य तथा पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर बाजे गाजे के साथ देवी माता को चुनरी चढ़ाकर मंगलमय की कामना करते हैं। शादी के बाद क्षेत्र की महिलाएं दुल्हा व दुल्हन के कक्कन छुड़वाने हेतु गांगी में स्नान के बाद देवी माता मंदिर पर हाजिरी जरुर लगाते हैं।
बरहपुर गांव के प्रधानों द्वारा समय समय पर इस स्थल का सुन्दरीकरण होता रहा।वर्तमान ग्राम प्रधान सबलू सिंह ने मंदिर स्थल से पूर्व बड़ा सा भव्य गेट तथा हवन कुण्ड के ऊपर पक्का छत्रक तथा मंदिर के चारों तरफ टाइल्स तथा स्टील ग्रिल लगवाकर मां के मंदिर में चार चांद लगा दिया है। अब प्रतिदिन पचासों लोगों सुबह शाम आरती में भाग लेते है।

