Thursday, July 16, 2026
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चुनावी बयानबाजी से बाहर निकलें सरकार, मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा… मोहन भागवत

चुनावी बयानबाजी से बाहर निकलें सरकार, मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा… मोहन भागवत

नागपुर- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने चुनावी बयानबाजी पर सख्त टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से मणिपुर मुद्दे को जल्द सुलझाने के लिए कहा है। भागवत ने कहा, मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है। इस पर प्राथमिकता के साथ विचार करना होगा।संघ प्रशिक्षुओं की सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने सभी समुदायों के बीच एकता पर जोर दिया। कहा, विभिन्न स्थानों व समाज में संघर्ष अच्छा नहीं है संघ प्रमुख ने कहा, दस साल पहले मणिपुर में शांति थी। ऐसा लगा था कि वहां बंदूक संस्कृति खत्म हो गई है, लेकिन राज्य में अचानक हिंसा बढ़ गई।

भागवत ने कहा, चाहे हिंसा भड़की मोहन भागवत क्यों हुआ, कैसे हुआ में संघ नहीं उलझता लोकसभा चुनाव पर भागवत ने कहा, जनादेश आ गया, सरकार बन गई। इसलिए, ऐसा क्यों व कैसे हुआ, जैसी बातों से बचना चाहिए। संघ को इससे मतलब नहीं है। संघ जनमत परिष्कृत करने का काम करता है, इस बार भी किया, पर नतीजों के विश्लेषण में नहीं उलझता।

उन्होंने सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि दस साल में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। या भड़काई गई, जल तो मणिपुर रहा है और लोग उसकी चरम तपिश का सामना कर रहे हैं। भागवत ने कहा, चुनावी बयानबाजी से उठकर मौजूद समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
संघ प्रमुख ने नसीहत देते हुए कहा, जो अपने काम करने को लेकर अहंकार न पाले, वही अच्छा सेवक है।

काम सब लोग करते हैं, लेकिन काम करते समय मर्यादा का भी पालन करना चाहिए। उसके काम से किसी को चोट न पहुंचे। मर्यादा ही अपना धर्म और संस्कृति है। उस मर्यादा का पालन करके जो चलता है, वो कर्म करता है, कर्मों में लिप्त नहीं होता। उसमें अहंकार नहीं आता कि मैंने किया है।

■ चुनाव स्पर्धा है, युद्ध नहीं संघ प्रमुख ने कहा, जब चुनाव होता है, तो स्पर्धा जरूरी होती है। इस दौरान दूसरों को पीछे करना होता है, लेकिन इसकी एक सीमा
होती है। यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए। चुनाव बहुमत पाने के लिए होता है। चुनाव स्पर्धा है, युद्ध नहीं। उन्होंने कहा, संसद में दो पक्ष क्यों होते हैं? ताकि किसी भी मुद्दे के दोनों पक्षों का समाधान किया जा सके। जिस प्रकार सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही हर मुद्दे के दो पहलू होते हैं।

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