भारतीय संस्कृति में धार्मिक महत्व रखने वाली बुद्ध पूर्णिमा को इस वर्ष पहला चंद्र ग्रहण होगा। उपच्छाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की परिक्रमा करने के दौरान चंद्रमा पेनुम्ब्रा से हो कर गुजरता है। यह पृथ्वी की छाया का बाहरी भाग होता है। उपछाया चंद्र ग्रहण के कारण चंद्रमा के आकार में किसी भी तरह का कोई भी परिवर्तन नहीं होगा। इस दौरान, चंद्रमा सामान्य से थोड़ा गहरा दिखाई देता है। ग्रहण के दौरान चन्द्रमा मटमैला सा दिखाई देगा। इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।

इस वर्ष 5 मई को लगने वाला चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण है। जो रात में विश्व के कुछ क्षेत्रों में दर्शनीय होगा। भारत में यह दिखाईं नहीं देगा। भारतीय समयानुसार यह चन्द्र ग्रहण 5 मई को बैसाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) को रात 08 बजकर 45 मिनट पर आरंभ होगा और अर्धरात्रि करीब एक बजे समाप्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि सवा 4 घंटे कीट होगी। यह चन्द्र ग्रहण भारत से दिखाई नहीं पड़ेगा। यह यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, प्रशांत, अटलांटिक और हिन्द महासागर के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।

