मानसून सत्र के पहले ही राजधानी में सपा ने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा को लेकर वर्तमान सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन।
लखनऊ – मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राजधानी में सपा ने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सड़क से सदन तक जमकर हंगामा किया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सड़क पर उतरकर अपने पार्टी नेताओं की अगुवाई की तो वहीं, विधान परिषद में पार्टी के नेताओं ने वेल में आकर शिक्षा के बाजारीकरण का आरोप लगाया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में तहत सपा विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सोमवार को पार्टी कार्यालय से विधानसभा तक पैदल मार्च किया। पुलिस ने जब उन्हें विक्रमादित्य मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर रोका तो वे सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
अखिलेश ने सड़क पर ही छद्म विधानसभा लगाई और गोला गोकर्णनाथ के विधायक अरविंद गिरी को श्रद्धांजलि दी। प्रदर्शन के दौरान सपाइयों की पुलिसकर्मियों से तीखी झड़प हुई। नौबत धक्कामुक्की तक आ गई। अखिलेश व सपा विधायकों ने पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाया।
अखिलेश के साथ मार्च में शामिल विधायकों के हाथों में बेरोजगारी, महंगाई, महिलाओं के शोषण, कानून-व्यवस्था बदहाली, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र की दुर्व्यवस्था, बिजली संकट, नौजवानों की के साथ अन्याय, किसानों की समस्याओं और सपा नेताओं पर फर्जी मुकदमों के विरोध में लिखी तख्तियां थीं।
जिस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि भाजपा सरकार ने लोकतंत्र की हत्या की है। सदन की कार्यवाही में शामिल होना विधायकों का संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकार है। लोकतंत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सरकार पुलिस बल लगाकर विधायकों को कार्यवाही में शामिल न होने दें।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार इससे साबित कर रही है कि वह जनाक्रोश के डर से कितना असुरक्षित महसूस कर रही है । सत्ता जितनी कमजोर होती है, दमन उतना ही अधिक बढ़ता है। अखिलेश ने एलान किया कि सपा लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए सदन और सड़क का रास्ता अपनाएगी।
भाजपा सरकार की गलत नीतियों का विरोध करेगी। वहीं, पार्टी कार्यालय से विधानभवन के लिए निकले सपाइयों ने आरोप लगाया कि उन्होंने राजभवन के रास्ते विधानसभा के गेट नंबर एक से प्रवेश करने की अनुमति ली थी, पर पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया।

