9 साल के कानूनी जंग के बाद 915 फ्लैट और 21 दुकानों वाले एपेक्स और सियान ट्विन टावर हुआ धराशायी।
नोएडा / दिल्ली- भ्रष्टाचार की नींव पर खड़े सुपरटेक बिल्डर के 915 फ्लैट और 21 दुकानों वाले एपेक्स और सियान ट्विन टावर रविवार को मात्र 12 सेकंड में धराशायी हो गए। रविवार दोपहर 2:25 बजे सायरन बजने के साथ ही अंतिम गिनती शुरू हुई।
2 बजकर 31 मिनट पर टावर में धमाका हुआ। जमीन में कंपन के. साथ अगले कुछ पलों में ही दोनों टावर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। FIR नियंत्रित धमाके के दस मिनट बाद तक धूल का गुबार छाया रहा। गुबार छंटा तो सामने था करीब 80 हजार टन मलबा, जो साढ़े चार मंजिल जितना ऊंचा था। नोएडा के हजारों लोग इस ऐतिहासिक घटना के गवाह बने।
टावरों को गिराने के लिए दुनिया की जानी-मानी कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग की सेवा ली गई थी। प्रशासन ने इसे एक सफल धमाका बताया । नोएडा की सीईओ रितु माहेश्वरी ने बताया, इस धमाके से पास की एटीएस सोसाइटी की 7-8 मीटर की चहारदीवारी के साथ ही कुछ घरों की खिड़कियों के कांच टूट गए हैं। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
जबकि सुपरटेक ने कहा- 500 करोड़ का हुआ नुकसान
सुपरटेक के चेयरमैन आरके अरोड़ा ने बताया कि ट्विन टावर गिरने से 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें 3700 किलोग्राम विस्फोटक के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत आई। चेयरमैन आरके अरोड़ा ने नियमों के तहत टावर बनाने की बात कही इसके अलावा जमीन खरीद, निर्माण की लागत, प्राधिकरण से कई मामलों में मंजूरी लेने में फीस, बैंकों को दिया गया ब्याज और दोनों टावरों के खरीदारों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाई गई।
जो टावर गिराए गए, उसके 900 फ्लैटों की वर्तमान बाजार दर 700 करोड़ थी। इसका कुल बिल्टअप एरिया आठ लाख वर्गमीटर में था। ट्विन टावर का निर्माण प्राधिकरण के नियमों के तहत किया गया था । इसके अलावा सुपरटेक की ओर से एडिफिस इंजीनियरिंग को 17.5 करोड़ रुपये गिराने के लिए दिए गए। इसके अलावा 100 करोड़ का बीमा कराया गया था। इसका प्रीमियम भी भरा गया।
ट्विन टावर ध्वस्त करने में लगें ब्रह्मोस मिसाइल जितना लगा विस्फोटक।
32 मंजिला एपेक्स और 29 मंजिला सियान टावर को ढहाने में 3,700 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक ब्रह्मोस मिसाइल अधिकतम 300 किलो तक का विस्फोटक ले जा सकती है। मतलब, 12 ब्रह्मोस मिसाइल जितने विस्फोटक से इमारत गिराई गई। यह मात्रा पृथ्वी मिसाइल से चार गुना और अग्नि मिसाइल से तीन गुना ज्यादा है
अग्नि मिसाइल : अग्नि-5 आईसीबीएम मिसाइल की ऊंचाई 17 मीटर और व्यास 2 मीटर है। मिसाइल का वजन 50 टन है। जो कि 1.5 टन तक वॉरहेड ढोने में सक्षम है।
ब्रह्मोस मिसाइल : ब्रह्मोस ठोस प्रणोदक बूस्टर इंजन के साथ एक दो-स्तरीय मिसाइल है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम यह मिसाइल 200-300 किलोग्राम वजन ढो सकती है।
पृथ्वी मिसाइल : पृथ्वी-1 एक सिंगल-स्टेज तरल ईंधन पर चलने वाली सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 150 किमी है। पृथ्वी मिसाइल 1,000 किलो वॉरहेड के साथ दुश्मन के ठिकानों पूरी तरह तबाह कर सकती।
एक घंटे तक विस्फोटकों की जांच
ट्विन टावर गिरने के बाद सबसे बड़ी चुनौती जिंदा विस्फोटकों को तलाशने की थी। करीब आधे घंटे बाद एडिफिस और उसकी सहयोगी कंपनी जेट डिमोलिशन के एक्सपर्ट मलबे के ढेर के पास पहुंचे। शाम चार बजे तक विस्फोटकों की तलाश के बाद सुरक्षित डिमोलिशन की जानकारी दी गई। हालांकि, निवासियों को पांच बजे के बाद ही अपने घर लौटने की अनुमति दी गई थी।
लेकिन प्राधिकरण ने सफाई व्यवस्था के चलते रात 9. बजे से पहले सोसाइटी की एंट्री खोलने के इंकार कर दिया। धमाके से नहीं, इमारत गिरने से कंपन: टावर ध्वस्त करने वाली एडिफिस कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के लिहाज से नोएडा सेस्मिक जोन-5 में आता है। आमतौर पर यहां भूकंप की गति रिक्टर स्केल के पैमाने पर चार के आसपास रही है। मतलब 300 से 400 मिमी प्रति सेकंड का कंपन हुआ है।
रातभर घर नहीं लाट निवासा एमराल्ड कोर्ट और एटीएस सोसाइटी को पूरी तरह खाली करा लिया गया था। यहां के पांच हजार से ज्यादा निवासी शनिवार शाम और रविवार सवेरे ही अपने घरों पर ताला लगाकर जा चुके थे। टावर ध्वस्त होने के बाद शाम पांच बजे बिजली आपूर्ति सही कर दी गई।
रात नौ बजे से लोगों को घर लौटने की अनुमति दी जा चुकी थी, 90 फीसदी निवासियों ने घर से बाहर रहना ही मुनासिब समझा। इस लिहाज से 25 मिमी का कंपन होने से इमारतें सुरक्षित हैं। ट्विन टावर गिरने से इससे 12 से 16 गुना कम होने का अनुमान है। एडिफिस के पार्टनल जिगर छेदा ने बताया, धमाकों से नहीं, बल्कि इमारतों के जमीन पर गिरने से कंपन की स्थिति पैदा हुई।

