Sunday, May 31, 2026
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जनपद में 4.58 लाख नवजात बच्चों को पिलाई जाएगी विटामिन ए की खुराक

ग़ाज़ीपुर- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बाल स्वास्थ्य पोषण अभियान के अन्तर्गत बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में एसीएमओ डॉ डीपी सिन्हा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय नियोजन बैठक व प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।

जिसमे नवजात बच्चों को कई तरह की बीमारियों से बचाने के लिए से बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरुआत की जा चुकी जिसमे नौ माह से पाँच साल तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाई जाएगी ।

इसको लेकर मंगलवार को जिसमें प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक (एमओआईसी), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम) एवं बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से सीडीपीओ ने प्रतिभाग किया । प्रशिक्षण लेने के पश्चात ब्लॉक स्तर पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे। यह प्रशिक्षण न्यूट्रीशन इंटरनेशनल की मंडलीय समन्वयक (वाराणसी मण्डल) अपराजिता सिंह ने दिया।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ उमेश कुमार ने बताया कि अभियान में नौ माह से पाँच वर्ष तक के बच्चों के लिए विटामिन ए की संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें विटामिन ए की खुराक से आच्छादित किया जाएगा । उन्होंने बताया कि जिले में नौ माह से 12 माह के बच्चों की संख्या 26,776 है जिन्हें आधा चम्मच, 16 माह से 24 माह के बच्चों की संख्या 1.15 लाख तथा दो साल से पाँच साल के बच्चे करीब तीन लाख है जिन्हें पूरा चम्मच विटामिन ए की खुराक पिलाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम 31 जुलाई को नगरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाथीखाना पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के द्वारा किया जाएगा।
अपराजिता सिंह ने बताया कि इस अभियान में नौ माह से पाँच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाई जाएगी। इस दवा से बाल रोगों की रोकथाम होती है। इसके अलावा अभियान का उद्देश्य स्तनपान, बच्चों को पूरक आहार को बढ़ावा देने, कुपोषण से बचाव करना, आयोडीन युक्त नमक के प्रयोग को बढ़ावा देना है।

अभियान को सफल बनाने के लिए आशा, एएनएम तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तैनात किया गया है। अभियान के अंतर्गत कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की पहचान करने के बाद उनका समुचित उपचार किया जाएगा।

आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को अस्पतालों में इलाज के लिए भी भेजा जाएगा। पोषण माह के तहत बच्चों का वजन भी लिया जाएगा, जिससे कुपोषित बच्चों चिन्हित किया जा सके।

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