जमानिया / गाजीपुर- क्षेत्र स्थित नगर पालिका परिषद जमानिया विभाग द्वारा शनिवार सायंकाल महर्षि बाल्मीकि जयंती पर उनको स्मरण करते हुए रामायण पाठ का आयोजन किया गया।
जिस दौरान नगर पालिका परिषद जमानिया के समीप स्थित मन्दिर में कर्मचारियों द्वारा महर्षि बाल्मीकि विश्व के आदि कवि जिन्होंने प्रसिद्ध कालजयी कृति रामायण महाकाव्य की रचना भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन काल में रचित महाकाव्य में भगवान श्री राम जीवन पर आधारित सामाजिक मूल्यों एवं राष्ट्रीय मूल्यों को संगीतमय श्लोक पढ़ते हुए कार्यक्रम को अग्रसर कि
धन्या खलु महात्मानो ये बुध्या कोपमुपत्थितम् ।
निरुन्धन्ति महात्मानो दिप्तमग्निमिवाम्भसा ॥
(यथा) महात्मानः दिप्तम् अग्निम् अम्भसा निरुन्धन्ति (तथा) इव ये महात्मानः उपत्थितम् कोपम् बुध्या (निरुन्धन्ति ते) खलु धन्या ।
वे महात्माजन धन्य हैं जो मन में उठे क्रोध को स्वविवेक से रोक लेते हैं, कुछ वैसे ही जैसे अधिसंख्य लोग जलती अग्नि को जल छिड़ककर शांत करते हैं ।
क्रुद्धः पापं न कुर्यात् कः क्रृद्धो हन्यात् गुरूनपि ।
क्रुद्धः परुषया वाचा नरः साधूनधिक्षिपेत् ॥
कः क्रुद्धः पापं न कुर्यात्, क्रृद्धः गुरून् अपि हन्यात्, क्रुद्धः नरः परुषया वाचा साधून् अधिक्षिपेत् ।
क्रोध से भरा हुआ कौन व्यक्ति पापकर्म नहीं कर बैठता है ? कुद्ध मनुष्य बड़े एवं पूज्य जनों को तक मार डालता है । ऐसा व्यक्ति कटु वचनों से साधुजनों पर भी निराधार आक्षेप लगाता है ।
वाच्यावाच्यं प्रकुपितो न विजानाति कर्हिचित् ।
नाकार्यमस्ति क्रुद्धस्य नावाच्यं विद्यते क्वचित् ॥
प्रकुपितः वाच्य-अवाच्यं न विजानाति, क्रुद्धस्य कर्हिचित् अकार्यम् न अस्ति, क्वचित् अवाच्यं न विद्यते ।
गुस्से से भरा मनुष्य को किसी भी समय क्या कहना चाहिए और क्या नहीं का ज्ञान नहीं रहता है । ऐसे व्यक्ति के लिए कुछ भी अकार्य (न करने योग्य) नहीं होता है और न ही कहीं अवाच्य (न बोलने योग्य) रह जाता है ।
उक्त मौके पर विजय शंकर राय, विजय शंकर शर्मा , शंकर राम , सरोज कुमार, मनीष चौरसिया , हरिश्चंद्र, छविनाथ यादव, संजय यादव , मदन पाण्डेय, शारदा पाण्डेय आदि लोग मौजूद रहे


