कोरोना काल बना समाजिक व्यवस्था में रोधक‚ बन लोगों के मानसिकता को कर रहा हैं प्रभावित
कोरोना काल नें समाज और आर्थिक व्यवस्था पर अपना प्रभाव डाल चूका है लेंकिन अब कोरोना लोगों के मानसिकता को प्रभावित करतें हुए लोगों को अपने–आप से दूर करता जा रहा हैं।
कोविड-19 आसान शब्दों में कहाँ जायें तो “कोरोना” आखिरकार यें हैं क्या ? “ना तो हवा है ना तो पानी है‚ क्या बच्चा और क्या बूढ़ा‚ यह शब्द सबकी जुबानी हैं”आज यह “कोरोना” शब्द मानव जगत में प्रत्येक प्राणी के जिह्वा पर हैं, क्या बच्चा और क्या बूढ़ा‚आज यह शब्द सबके जुबान सें सुना जा रहा हैं‚ माना यह शब्द एक विकराल प्रलय से कम नहीं हैं, केवल इस नाम सें हीं लोंग की अन्तर आत्मा को झकझाेंर कर रख दिया हैंं।
इस मामूली सें शब्द नें इस समाजिक व्यवस्था पर जो प्रभाव डाला हैं‚यह शब्द समाजिक व्यवस्था में एक रोधक के सामान कार्य करतें हुए‚यह अपना प्रभाव हमारें समाज के लोगों के मानसिकता पर लम्बें समय तक बनायें रखेंगा।
हम आप जानतें हैं कि हम आज सें हीं नहीं बल्कि हम पुरातन काल सें दूर होते जा रहें है। हमारें समाज कों अनेकों प्रकार सें बाँटा गया कभी छुवा–छूत ‚ तो कभीं भेंद–भाव‚ के द्वारा समाज को बाटनें का कार्य आज सें ही नहीं किया जा रहा बल्कि पुरातन काल सें हीं यह काम चलता आ रहा हैं प्रकृति भी बदलाव चाहती हैं।
आज वहीं वर्तमान समय में “कोरोना” हमें बाटनें के सथ– साथ तोंडने का काम कर रहीं हैं। सन् 1947 भारत के विभाजन से करोड़ों लोग प्रभावित हुए और साथ ही हिंसा में करीब 10 लाख लोग मारे गए जिसके कारण गरीब दर्जा के लोंग करीब 1.45 करोड़ शरणार्थियों ने अपना घर-बार छोड़कर पराये देश जाना पड़ा। लोंग दाने–दाने के मोहताज हो गयें‚ कुछ तों भूखों मर गयें कुछ तों विमारी इस विभाजन नें भी समाज में बदलाव किया।
आज वर्तमान समय में “कोरोना” काल नें तो हमारें समाजिक व्यवस्था के साथ–साथ आर्थिक व्यवस्था को तोड़–मरोड़ कर रख दिया हैं। जिसका प्रभाव समाज के मध्यम और निम्न वर्ग के लोंगो पर पड़ेगा आज हम अपनें आप सें दूरी बना रहें कि जिस ,आर्थिक व्यवस्था,और शिक्षा व्यवस्था समस्याएं उत्पन्न हो रहे हैं इस महामारी के कारण
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