डेयरी एवं पशुपालन विभाग द्वारा वित्त पोषित लाभकारी दुग्ध व्यवसाय एव पशु प्रबंधन द्वारा क्षमता विकास परियोजना के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण का हुआ शुभारंभ ।
रेवतीपुर- भारत सरकार द्वारा डेयरी एवं पशुपालन विभाग द्वारा वित्त पोषित लाभकारी दुग्ध व्यवसाय एव पशु प्रबंधन द्वारा क्षमता विकास परियोजना के अंतर्गत आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित योजना के तहत सोमवार को ब्लॉक करंडा कृषि विज्ञान केंद्र तत्वाधान में करण्डा के 40 प्रगतिशील एवं जागरूक किसानों को समन्वित मछली पालन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर आर सी वर्मा ने किया।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. वर्मा कृषि एवं पशुपालन के साथ मछली पालन अपनाने के लिए किसानों से आह्वान किया एवं मछली पालन के द्वारा किसानों की आय कैसे बढ़ेगी एवं युवकों को रोजगार कैसे मिलेगा इस विषय पर चर्चा किया प्रशिक्षण में केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक पशुपालन डॉ. ए के सिंह ने मछली पालन करने की तकनीकी जैसे – तालाब का चुनाव उसमें पालने के लिए मछलियों के अनुपात की तीन पद्धतियों के बारे में बताया 1- भाकुर 40%, रोहू 30%, नैन 30% 2- भाकुर 20%, रोहू 30%, नैन 30% सिल्वर 30% 3- भाकुर 10%, रोहू 30%, नैन 15% ,सिल्वर 20% काम न कार्प 15%, ग्रास कार्प 10% का चुनाव करके एवं मछलियों के अच्छी बढ़वार के लिए संतुलित आहार के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
प्रबंधन के बारे में बताया कि उपरोक्त कई तरह की मछलियों को एक साथ पालने से फायदा होता है मछलियों के आहार ग्रहण करने की आदत अलग-अलग होती है तो उपरोक्त पद्धति से मछली पालन करने में आहार की बचत भी होती है एवं आहार का नुकसान नहीं होता है 1 हेक्टेयर जल क्षेत्र के लिए लगभग 75 मी.मी. या 150 मि.मी. तक लंबाई की 5000 से 6000 मत्स्य बीज की आवश्यकता होती है। मछलियां साल भर में 1.0 से 1.5 कि.ग्रा. किलोग्राम तक वजन की हो जाती है।
प्रशिक्षण के दौरान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ जेपी सिंह तालाब की मिट्टी की जांच, पानी का पीएच मान एवं गोबर की खाद एवं उर्वरक अमोनियम सल्फेट, सिंगल सुपर फास्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश आदि का किस अनुपात में कैसे प्रयोग करना चाहिए किसानों को जानकारी दी प्रशिक्षण मैं पशुधन प्रसार अधिकारी एवं करंडा के रणविजय सिंह, रामजी सिंह, सुरेंद्र राम, अब्दुल, राजेंद्र बिंद आदि मौजूद रहे एवं कर्मचारियों में उमेश सिंह एवं अंकुश राय का का विशेष सहयोग रहा

