यूरिया और डीएपी के लिए किसान हो रहे है परेशान, सरकारी व्यवस्था फिसड्डी
जमानियां / जमानिया- भारतीय जनता पार्टी कहें तो किसानों की पार्टी लेकिन किसान इस सरकार से खुश नहीं है पहले तो कुछ वर्ष कोरोनाकाल किसानों के विकास काल को रोक दिया तो कभी सूखा तो कभी बाढ़ ने परेशान को बढ़ाया है।
फ़ोटो- साधन सहकारी समिति जमानियां कस्बा पर लटकता सरकारी ताला
किसानों को सहकारी समितियां अब यूरिया और डीएपी के लिए रूला रही है। धान की नर्सरी डालने के बाद किसान अब डी0ए0पी0 यूरिया के लिए दर दर समितियों पर भटक रहे हैं। समितियों पर ताले लटकने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा।
मजबूरन बाजार से महंगे दाम पर खाद की खरीदारी करनी पड़ रही है। खरीफ और रबी सीजन में समितियों के माध्यम से डीएपी, एनपीके और यूरिया को उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि कभी भी समय से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता।
तहसील क्षेत्र में कुल 7 समिति है लेकिन क्षेत्र में संचालित सभी समितियों से यूरिया‚ डीएपी नदारद है। रोज-रोज समितियों का चक्कर लगाकर थक चुके किसान अब बाजार का रुख करने को मजबूर हैं। खुले बाजार में यूरिया तो उपलब्ध है लेकिन वह महंगे दामों पर बिक रही है।
शुद्धता की भी गारंटी नहीं है। समिति पर यूरिया 266.50 तथा डीएपी 1200 रुपये मूल्य निर्धारित है जबकि बाजारों में यूरियां 350 से लेकर 400 तक बिक रहा है। वही डीएपी 1300 से 1500 रुपये तक बिक रहा है।
क्षेत्र के साधन सहकारी समिति बघरी‚ तियरी‚ संघ जमानियां कस्बा के सचिव संदीप कुमार ने बताया कि इन समिति पर जिला मुख्यालय से अब तक यूरिया और डीएपी नहीं मिल पाया है। जबकि पीसीएफ गाजीपुर से आरओ करीब 10 दिन पहले की कट चुका है लेकिन ठेकेदार की हिल्ला हवाली की वजह से अब तक नहीं मिल पाया है।
बताया कि 57 टन डीएपी और 20 टन यूरिया का डिमांड भेजा गया है। लेकिन अब तक समिति पर खाद नहीं पहुंचा है। जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। यूरिया और डीएपी नहीं मिल रही तो कैसे वितरित करें। जो भी हो यह हालात बेहद चिंताजनक हैं।


