हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 में हुए संशोधन से पहले पैदा हुई‚ बेटी को पैतृक संपत्ति में बेटे के समान बराबरी का अधिकार
देश/ विदेश – भूतकाल सें ही महिलाओं के साथ हों रहेें अत्याचार का खात्मा करने को लेकर हमारे महापुरुषो नें जों आधारशिला और जो मार्ग तैयार किया हैं आज वर्तमान समय में हमारा संविधान एक महापुरुष की भाँति समाज की महिला वर्ग को मजबूत करनें का काम कर रहा हैं।
वर्तमान समय में महिला सशक्तिकरण का दौर है आज महिलाएं आँगन से लेकर अंतरिक्ष तक पहुँच गयी हैं लेकिन फिर भी कुछ क्षेत्रों में महिलाओं की हालत दयनीय बनी हुई है| इसलिए महिलाओं को समाज में और भी सशक्त बनाने के लिए सरकार ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, हिंदू विवाह अधिनियम (1955) और दहेज निषेध अधिनियम (1961) जैसे कानून बनाये हैं
उत्तराधिकार अधिनियम पैतृक संपत्ति में बेटी का जन्म सें बराबरी के अधिकार के अहम फैसले को लेेंकर में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की व्याख्या करते हुए कहाँ गया कि दिनांक 9 सितंबर 2005 थे पहले पैदा हुई बेटी भी संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकती है लेकिन एक शर्त होगी कि वह संपत्ति 20 सितंबर 2004 से पहले किसी कानून बंद पत्र के द्वारा बिक्री वसीयत या अन्य किसी तरह से समाप्त ना कर दी गई।
हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 में हुए संशोधन से पहले पैदा हुए या बाद में उस बेटे के समान है बराबरी का हक है सन 2005 में हुआ था इस बात में कोई फर्क नहीं पड़ता कि कानून में संशोधन के समय पिता जीवित है या नहीं तारीख 9 सितंबर 2005 थे पहले पैदा हुई बेटी भी संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकती है।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्र अब्दुल नजीर और एस शाह की की पीठ फैसले ने कहा कि क्योंकि बेटी को जन्म सें संपत्ति पर हक प्राप्त होता है इसलिए संशोधित कानून लागू होने की तिथि को पिता का जीवित होना जरूरी नहीं है संपत्ति के मौके के बंटवारे की कोई दलील स्वीकार नहीं की जा सकती।
कानून की धारा 65 के मुताबिक संपत्ति का बंटवारा रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड डीड से होना चाहिए‚यद्पि कोर्ट की डिंग्री से अपवाद के मामले में संपत्ति बंटवारे की दलील अन्य सहयोगी दस्तावेजी सबूतों के आधार पर स्वीकार की जा सकती हैं।
बेटियों को पैतृक संपत्ति पर हक देने के हिंदू उत्तराधिकार संशोधन कानून की व्याख्या करते हुए पूर्व में सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीटने प्रकाश बनाम फूलमती किसने कहा था कि संशोधित कानून की धारा फंसे पूर्व नहीं होगी लागू नहीं होगी
कानून की धारा 65 के मुताबिक संपत्ति का बंटवारा रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड डीड से होना चाहिए या फिर कोर्ट की डिग्री से अपवाद के मामले में संपत्ति बंटवारे की दलील अन्य सहयोगी दस्तावेजी सबूतों के आधार पर स्वीकार की जा सकती हैं।

